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कश्मीर की लड़कियों के लिए मसीहा बना ये शख्स, अमेरिका ने किया सम्मानित 

Sat, 03 Dec 2016 02:57 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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समाजिक कार्यकर्ता अधिक कदम
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बमबारी, गोली-बंदूकों की आवाजों, आतंवादी घटनाओं, सेना की कदम ताल की आवाजों और उनके मुद्दों पर पूरे देश में हो रही राजनीति के बीच कश्मीर से एक अच्छी खबर आई है। जहां लोग नई पीढ़ी के भविष्य के लिए चिंतित हैं, वहीं एक शख्स इसे संवारने के लिए दिन-रात काम कर रहा है।
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द हिन्दू में छपी खबर के मुताबिक, समाजिक कार्यकर्ता अधिक कदम, 1990 से ही कश्मीर में अनाथ बच्चों, खासकर लड़कियों को शिक्षित करने का काम कर रहें हैं। कश्मीर में उनकी इस पहल से खासा असर पड़ा है। आज उनके इस कार्य की देश ही नहीं विदेशों में भी प्रशंसा हो रही है। बीते माह ही उन्हें अमेरिका के कैलीफोर्निया में इस सरहानीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

महाराष्ट्र के किसान परिवार में जन्में अधिक कदम ने जब अपने दोस्तों से कश्मीर की समस्या के बारे में सुना तो उन्होंने वहां खुद जाकर वहां की स्थिति और लोगों की परेशानियों को करीब से समझने का फैसला किया। अधिक कदम पहली बार 15 दिनों के लिए कश्मीर गए थे, लकिन उन्होंने वहां 4 महीने गुजारे।
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अधिक कदम ने बताया, 'घाटी एक अंशात जगह थी और यह एक संकेत था मुझे कश्मीर में बच्चों के लिए कुछ करने के लिए।' उनका काम कश्मीरी बच्चों, खासकर लड़कियों पर केंद्रित है जिन्होंने घाटी में जारी हिंसा की वजह से अपने मां-बाप को खो दिया है।
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जब जासूस समझ उग्रवादियों ने कदम का किया अपहरण

- फोटो : thebetterindia.com
अधिक कदम, बार्डरलेस वर्ल्ड फाउंडेशन संस्था के संस्थापक और चेयरमैन हैं। यह एक एनजीओ है जो भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले वंचित और पीड़ित लोगों के लिए काम करता है। इस संस्था का जो पहला प्रोजेक्ट था उसका नाम था बसरिया-ए-तबस्सुम, यानी मुस्कान का घर। इस प्रोजेक्ट के जरिए अधिक कदम ने कुपवाड़ा जिले में अनाथ लड़कियों को रहने के लिए घर का प्रबंध किया था।

इस बीच कश्मीरी उग्रवादियों ने अधिक कदम को  जासूस समझ कर अपहरण भी किया। पिछले 15 सालों में उनके साथ ये वारदात 19 दफा हो चुका है। इन वाकयों ने कदम के इरादों को और मजबूत किया हैं। आज कदम के एनजीओ की चर्चा पूरे कश्मीर घाटी में हैं जिस वजह से अब उन्हें वित्तीय मदद भी मिलने लगी है साथ ही वॉलंटियर्स भी उनकी संस्था से जुड़ने लगे हैं। एक साक्षात्कार में कदम ने कहा, 'यह सब स्थानीय लोगों की मदद के बिना संभव नहीं हो पाता। उन्होंने मुझे आर्थिक रूप से मदद की और साथ ही मेरी सुरक्षा भी सुनिश्चित की।'

धीरे-धीरे कदम की संस्था ने अनंतनाग, बीरवाह और जम्मू में भी अनाथ लड़कियों के रहने के लिए घरों की व्यवस्था की। आज यहां अपने परिजनों को खो चुकीं 200 से ज्यादा लड़कियां रहती हैं। अधिक कदम ने बताया कि उनका प्राथमिक ध्यान वहां कि लड़कियां हैं जो एक पितृसत्तामक मे पल-बढ़ रहीं हैं। उन्होंने कहा, 'यहां कश्मीर में कई लोग हैं जो लड़को की बेहतरी के लिए कार्य कर रहें हैं लेकिन सुरक्षा कारणों से लड़कियों की जिम्मेदारी लेने के लिए यहां कोई तैयार नहीं हैं।'

अधिक कदम का यह अथक प्रयास बेकार नहीं गया। आज कदम की संस्था से पढ़ी कश्मीर की 25 से अधिक लड़कियां भारत के अन्य भागों में अपने सुनहरे भविष्य के लिए पढ़ रहीं हैं।
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