लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस देश की बहुत पुरानी पार्टी है। व्यापक जनाधार वाली एक राष्ट्रीय पार्टी है। कर्नाटक में हमने क्षेत्रीय पार्टी जेडीएस को समर्थन दिया है ताकि देश के संविधान और संप्रभुता के साथ लोकतंत्र की मर्यादा बनी रहे। लेकिन गठबंधन सरकार में हम किसी की मनमानी नहीं चलने देंगे। हमारी पार्टी अपनी विरासत का ख्याल रखते हुए केंद्र के स्तर पर सभी अन्य पार्टियों से वांछनीय सहयोगी की अपेक्षा रखती है। राष्ट्रीय राजनीति में सहयोग के साथ कर्नाटक में कैबिनेट के गठन पर देकर-लेने की संभावना से भी खड़गे ने इनकार नहीं किया है।
हालिया कर्नाटक विधानसभा में किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। भाजपा को 104, कांग्रेस को 78 तथा जेडीएस को 38 सीटें मिली हैं। शुरू में राज्यपाल वजुभाई वाला ने सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया और बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा को शनिवार को 4 बजे बहुमत सिद्ध करने को कहा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों में एकता बनाए रखी। भाजपा के पास विधानसभा में संख्या बल का पर्याप्त अभाव रहा। नतीजन येदियुरप्पा को महज ढाई दिनों में ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
भाजपा सरकार गिरने के बाद राज्य में जेडीएस के नेतृत्व में कांग्रेस के सहयोग से गठबंधन सरकार बनने जा रही है। बुधवार को जेडीएस के कुमारस्वामी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। कांग्रेस का यह बयान कर्नाटक की नई गठबंधन सरकार को लेकर गंभीर माना जा रहा है। बयान से साफ है कि कांग्रेस अपने सहयोग के बदले जेडीएस ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रीय पार्टियों से भी राष्ट्रीय राजनीति पर एक नए फलक की अपेक्षा कर रही है। ताकि अगले साल आम चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर उसे व्यापक जन समर्थन मिल सके। और वह मोदी सरकार के एक बेहतर विकल्प के रूप में जनता के सामने आ सके।