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खगोलीय घटना: पृथ्वी के पास से गुजरा विशाल एस्टेरॉयड; 48800 किमी प्रति घंटा थी रफ्तार; 3 साल बाद फिर होगा नजदीक

Tue, 08 Jul 2025 05:35 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क

सार

2025 एनजे नाम का लगभग 85 फीट चौड़ा अंतरिक्षीय पिंड सोमवार दोपहर 3:16 बजे पृथ्वी की कक्षा के बेहद पास से गुजरा। 48,800 किमी/घंटा की रफ्तार से यह पिंड 22.4 लाख किमी दूरी से निकला। संभावित खतरनाक श्रेणी में आने वाला यह पिंड 15 सितंबर 2028 को फिर पास आएगा।

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साकेंतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार
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विशाल अंतरिक्षीय पिंड 2025 एनजे सोमवार को दोपहर ठीक 3 बजकर 16 मिनट पर पृथ्वी की कक्षा के अत्यंत समीप से होकर गुजरा। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया कि लगभग 85 फीट चौड़ी यह अंतरिक्षीय चट्टान 48,800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की कक्षा से लगभग लगभग 22.4 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरी।  
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वैज्ञानिकों के अनुसार, करीब एक फुटबॉल मैदान के बराबर आकार वाले इस पिंड के पृथ्वी से टकराने की कोई आशंका नहीं थी, लेकिन इसका आकार और रफ्तार इसे संभावित रूप से खतरनाक श्रेणी में रखते हैं। यह अंतरिक्षीय पिंड अपोलो वर्ग के उन निकट-पृथ्वी पिंडों में से है, जो सूर्य के चारों ओर लंबवृत्तीय (आर्थोग्राफिक) मार्ग से भ्रमण करते हुए समय-समय पर पृथ्वी की कक्षा को पार करते हैं। इसका एक पूरा परिक्रमा काल लगभग 3 वर्ष 3 महीने का है।

इसकी गतिविधियों पर नासा लगातार निगरानी रखी जा रही है। यूरोपीय अंतरिक्ष संस्था (ईएसए) भी अपने ग्रह सुरक्षा कार्यालय के जरिए ऐसे पिंडों पर बारीकी से नजर बनाए रखती है। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार 2025 एनजे की अगली पृथ्वी के समीप उपस्थिति संभवतः 15 सितंबर, 2028 को हो सकती है, जब यह पृथ्वी से लगभग 22 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। ऐसे पिंडों पर सतत नजर रखना आवश्यक है। 
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पृथ्वी की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कारक
ऐसे ऐतिहासिक अनुभवों के आधार पर वैज्ञानिक इन पिंडों को केवल खगोलीय रुचि का विषय नहीं बल्कि पृथ्वी की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कारक मानते हैं। नासा और अन्य वैश्विक संस्थाएं निकट-पृथ्वी पिंडों की कक्षा, गति, आकार और भविष्य के संभावित प्रभाव का गहन अध्ययन कर रही हैं।

एटेन समूह से भी है संबंध, फिर भी नजर बनाए हुए हैं वैज्ञानिक
यह एस्टेरॉयड एटेन वर्ग के भी सदस्य होते हैं, जिनकी विशेषता है कि ये पृथ्वी की कक्षा को अक्सर पार करते हैं। एटेन क्षुद्रग्रहों का समूह है, जो पृथ्वी के नजदीक की कक्षा में चक्कर लगाते हैं।वैज्ञानिक ऐसे एस्टेरॉयडों पर विशेष नजर रखते हैं क्योंकि इनकी कक्षा में मामूली परिवर्तन भी भविष्य के लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए भले ही 2025 एनजे इस बार सुरक्षित रहा हो फिर भी इसकी आगे की गति पर नजर बनाए रखना आवश्यक है।
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भारत और वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियां सतर्क
इसरो भी इस घटनाक्रम पर सतर्क दृष्टि बनाए हुए था। इसरो, नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और जापान की जाक्सा जैसे वैश्विक संस्थान साथ मिलकर भविष्य में एस्टेरॉयड ट्रैकिंग और विक्षेपण तकनीकों को बेहतर करने पर कार्य कर रहे हैं। इसरो की दीर्घकालिक योजना में ऐसे मिशन भी शामिल हैं, जो एस्टेरॉयड पर लैंड कर उसकी संरचना का अध्ययन करेंगे।
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