केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी
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जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं के साथ हुए नरसंहार की 31वीं बरसी पर दुनियाभर के 15 देशों में बसे कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी से मिलकर घाटी में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों की जांच आयोग से कराने की मांग की।
साथ ही उन्होंने घाटी में 1400 से अधिक मंदिरों व प्राचीन पूजा स्थलों को बचाने के लिए जल्द से जल्द कानून लाने की भी मांग की। 19 जनवरी 1990 को इस्लामी जिहादियों ने घाटी से कश्मीरी हिंदुओं को मारकर भगा दिया था।
कश्मीर में हुए नरसंहार की 31वीं बरसी पर गृह राज्यमंत्री से मिले कश्मीरी पंडित
ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा के प्रतिनिधिमंडल ने रेड्डी को एक चार्टर सौंपा। इसमें कहा गया कि 1990 में आजादी की मांग करते हुए अलगाववादियों ने जिहादी अभियान शुरू किया और कश्मीर घाटी के हिंदुओं की बेरहमी से हत्याएं की।
इन आतंकियों ने अल्पसंख्यक हिंदुओं को या तो धर्म बदलकर इस्लाम अपनाने और भारत विरोधी अभियान का हिस्सा बनने का विकल्प दिया, जो इसे नहीं मानता था उनकी हत्या कर दी गई।
यही नहीं अनाथ बेटियों, महिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म किए गए, उनका धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम पुरुषों से शादी करा दी गई। चार्टर में आरोप लगाया कि अब तक जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मारे गए हिंदुओं की हत्या के मामले में एक भी अलगाववादी को नहीं पकड़ा। किसी को भी उसके जुर्म की सजा नहीं मिली। यही नहीं अब तक उस नरसंहार में आरोपपत्र भी दाखिल नहीं हुआ और मामले बंद कर दिए गए।
उत्पल कौल के नेतृत्व में रेड्डी से मिले प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से हिंदुओं को वापस कश्मीर में बसाने, 30 साल पहले हुए नरसंहार की आयोग से जांच कराने की मांग की। इसके अलावा हिंदुओं को निवास प्रमाणपत्र मिलने, आयुष्मान भारत और युवाओं के लिए प्रधानमंत्री योजनाओं का लाभ नहीं मिलने का भी मुद्दा उठाया।