ने बताया कि ट्रेन का पहला डिब्बा पटरी की बीम से टकराया और उसका अगला हिस्सा हवा में उछल गया और डिब्बे का पिछला हिस्सा भी झुक गया, जिसे शाम को एक भारी-भरकम क्रेन की मदद से पटरी से हटाया गया।
इससे पहले अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने बताया था कि दुर्घटना सुबह नौ बजे हुई और मोनोरेल से चालक दल के दो सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह दुर्घटना वडाला डिपो के ठीक बाहर एक ‘क्रॉसओवर’ पॉइंट पर हुई, जब सुबह करीब नौ बजे ‘सिग्नलिंग’ परीक्षण के लिए सफेद रंग के मोनोरेल रेक को बाहर निकाला जा रहा था। उन्होंने कहा कि परीक्षण में शामिल कंपनी का एक इंजीनियर ट्रेन कैप्टन के साथ था।
अधिकारियों ने बताया कि पहले कोच के अंडरगियर, कपलिंग और बोगियों को भारी नुकसान पहुंचा है, साथ ही पहियों के कवर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। गलियारे के नीचे से देखने पर ट्रेन दो बीमों के बीच फंसी हुई दिखाई दी, जिसका एक हिस्सा हवा में लटका हुआ था।
मोनोरेल प्रणाली में बोगी या गाड़ी जमीन से ऊपर उठी (एलिवेटेड) बीम के नीचे स्थित होती है, तथा इसमें पहिए और सस्पेंशन लगे होते हैं, जो बीम के साथ ट्रेन को दिशा और सहारा देते हैं। एमएमएमओपीएल ने मेधा एसएमएच रेल प्राइवेट लिमिटेड से 55 करोड़ रुपये प्रति कोच की दर से 10 चार-कोच वाली मोनोरेल ट्रेन खरीदी हैं। संचालक ने बताया कि संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण सिग्नलिंग प्रौद्योगिकी का परीक्षण मोनोरेल प्रणाली पर किया जा रहा है, जिसका क्रियान्वयन परियोजना के लिए नामित ठेकेदार मेधा एसएमएच द्वारा किया जा रहा है।
इससे पहले मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने बार-बार हो रही तकनीकी गड़बड़ियों की विस्तृत जांच के लिए एक समिति गठित की थी। पिछले महीनों में 20 अगस्त और 15 सितंबर को आई तकनीकी खराबियों के चलते सैकड़ों यात्री अलग-अलग स्थानों पर दो मोनोरेल ट्रेनों में फंस गए थे।
20 अगस्त 2025 को भारी बारिश के दौरान चेंबूर और भक्ति पार्क स्टेशन के बीच मोनोरेल खराब हो गई थी, जिससे 500 से अधिक यात्री ट्रेन में फंस गए थे। इसके बाद 15 सितंबर 2025 को, एक अन्य मोनोरेल ट्रेन में सॉफ्टवेयर खराबी आने से वडाला स्टेशन के पास 17 यात्रियों की आपातकालीन स्थिति से निकालना पड़ा था। जिसके चलते दो घंटे तक सेवाएं बाधित रही थीं।