कैसे बनता है अंतरिक्ष में कचरा
यह सवाल तो आपके मन में भी आ ही रहा होगा कि आखिर पृथ्वी के धरातल से इतने ऊपर अंतरिक्ष में कचरा कैसे फैल गया। दरअसल हर सैटेलाइट की एक उम्र होती है। जब यह समयावधि पूरी हो जाती है तो धरती पर स्थित नियंत्रण एजेंसी इसका उपयोग बंद कर देती है। फिर यह पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाते रहते हैं।
कई बार किसी तकनीकी खामी की वजह से भी इनका नियंत्रण खत्म हो जाता है और फिर ये बेकाबू कचरा बन जाते हैं। कुछ मामलों में तो कई सैटेलाइट विस्फोट से भी खराब हो जाते हैं और फिर छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटकर बिखर जाते हैं। अंतरिक्ष में घूमते हुए ये छोटे-छोटे टुकड़े अन्य अंतरिक्ष यान और संचार उपग्रहों को खराब या तबाह करने की ताकत रखते हैं।
कब शुरू हुई थी अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेजने की दौड़
1957 में सोवियत रूस ने दुनिया के पहले कृत्रिम उपग्रह स्पूतनिक-1 को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया था। इसके बाद अमेरिकी एजेंसी नासा अस्तित्व में आई। तब से आज तक हजारों उपग्रह, अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष शटल, अंतरिक्ष स्टेशन विभिन्न देशों द्वारा अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए जा चुके हैं। एक अनुमान के अनुसार, अभी तक विभिन्न देश 23 हजार से अधिक उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचा चुके हैं।
लेकिन हैरत की बात यह है कि फिलहाल लगभग 1200 सैटेलाइट ही सक्रिय हैं। बाकी 95 प्रतिशत उपग्रह कचरे का रूप ले चुके हैं। बेकार हो चुके ये 95 फीसदी कृत्रिम उपग्रह अभी भी अपनी कक्षाओं में निरंतर चक्कर लगा रहे हैं और अंतरिक्ष में कचरs को बढ़ा रहे हैं।
ठप हो सकता है संचार नेटवर्क
2007 में चीन ने एक 'एंटी सैटेलाइट मिसाइल' का परीक्षण किया, जिससे उसने अपने ही एक मौसम उपग्रह को नष्ट कर दिया था। इससे पैदा हुए हजारों टुकड़े अंतरिक्ष में आज भी तैर रहे हैं। यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) का कहना है कि यदि अंतरिक्ष के कचरे को पृथ्वी की कक्षा से साफ नहीं किया गया तो दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ता जाएगा। इससे उपग्रह ऑपरेटरों को करोड़ों का नुकसान हो सकता है, साथ ही मोबाइल और जीपीएस नेटवर्क भी ठप पड़ सकते हैं।
यह भी जान लीजिए
* आवाज से 24 गुना तेज वेग के साथ अंतरिक्ष में घूमता रहता है ये मलबा।
* 1979 में स्काईलैब के टुकड़े हिंद महासागर और ऑस्ट्रेलिया के ऊपर आकर गिरे थे, हालांकि संयोग से उस समय कोई हताहत नहीं हुआ था।
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार, अंतरिक्ष में परिक्रमा करते कचरे में 30 हजार किलोमीटर प्रति घंटे तक की अकल्पनीय गति मौजूद होती है। नतीजतन ये टुकड़े किसी भी उपग्रह, अंतरिक्ष शटल, अंतरिक्ष स्टेशन, अंतरिक्ष में चहलकदमी (स्पेसवॉक) करते हुए स्पेस सूट को भी चीरते हुए निकल सकता है। इस रफ्तार पर छोटे से छोटा टुकड़ा भी विमान या उपग्रह जैसी चीज को नष्ट कर सकता है। लगभग एक मिलीमीटर का एक टुकड़ा बेहद तेजी के साथ जनवरी 2017 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की खिड़की से टकराया था, जिससे खिड़की चटक गई थी।