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सिगरेट, तंबाकू के कारोबार में 9,139 करोड़ रुपये का घाटा, तस्करी में भारी इजाफा

Tue, 27 Mar 2018 08:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सिगरेट और तंबाकू उत्पादों की तस्करी की घटनाओं में 2014-15 के मुकाबले 2016-17 में 136 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बात फिक्की कास्केड की एक रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016-17 में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों की तस्करी की घटनाओं की संख्या बढ़कर 3,108 तक पहुंच गई, जो 2014-15 में 1,312 थी। फिक्की कास्केड देश में तस्करी कर लाए हुए और नकली वस्तुओं के मुद्दे पर काम करने वाला उद्योग संगठन है।
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तस्करी के आंकड़े

- फिक्की कास्केड के मुताबिक 2014-15 के मुकाबले 2016-17 में इनकी तस्करी की घटनाओं में 136 फीसदी की हुई है बढ़ोतरी
- 3,108 तस्करी की घटनाएं हुईं सिगरेट और तंबाकू उत्पादों की 2016-17 में
- 9,139 करोड़ रुपये का अनुमानित घाटा तंबाकू उत्पादों के अवैध कारोबार से 
- 6,705 करोड़ रुपये का अनुमानित घाटा मोबाइल फोन के अवैध कारोबार से
- 6,309 करोड़ रुपये का अनुमानित घाटा अल्कोहल युक्त पेय के अवैध कारोबार से

फिक्की कास्केड ने कहा कि हालांकि प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से निगरानी बढ़ी है, लेकिन यह ध्यान देने की बात है कि एजेंसियों द्वारा हुई जब्ती देश में अवैध कारोबार की इन विशाल और खतरनाक गतिविधियों की एक छोटी मिशाल भर ही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में प्रतिबंधित और तस्करी कर लाए हुए सामानों का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और यह भारतीय उद्योग जगत के सामने आ रही सबसे बड़ी चुनौतियों में से है।

कारोबार में घाटा

तंबाकू उत्पादों के अवैध कारोबार से सर्वाधिक घाटा

फिक्की कास्केड की रिपोर्ट के अनुसार, केवल सात विनिर्माण क्षेत्रों में अवैध कारोबार के कारण सरकार को 2014 में 39,239 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। विभिन्न क्षेत्रों में से तंबाकू उत्पादों के अवैध कारोबार से सरकारी खजाने को सर्वाधिक 9,139 करोड़ रुपये का अनुमानित घाटा हुआ। इसके बाद मोबाइल फोन के अवैध कारोबार से 6,705 करोड़ रुपये और अल्कोहल युक्त पेय के अवैध कारोबार से 6,309 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। 

केवल इन 7 सेक्टर की वजह से उद्योग जगत को हुआ घाटा 2011-12 से 2013-14 के दौरान 44.4 प्रतिशत बढ़कर 1,05,381 करोड़ रुपये रहा। जालसाजी और तस्करी के रूप में अवैध कारोबार का परिचालन और उसकी उपस्थिति बड़ी समस्या बन चुकी है, जिसका आकार बढ़ता जा रहा है। इससे उद्योग, सरकार, अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा पर भी दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

आतंकी कनेक्शन

तस्करी के आतंकी संगठनों से भी जुड़े हैं तार

इतना ही नहीं, तस्करी की घटनाओं का आतंकी संगठनों और आपराधिक नेटवर्क से करीबी संबंध भी है। वस्तुत: यह आज भारत और यहां के उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से है, जो वैश्विक स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। फिक्की की एक अन्य हालिया रिपोर्ट ‘अवैध कारोबार : आतंकवाद और संगठित अपराध का वित्तपोषक’ के मुताबिक, 2016 में भारत आतंकी गतिविधियों से सर्वाधिक प्रभावित देशों की सूची में तीसरे स्थान पर था, जबकि इराक और अफगानिस्तान क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर रहे। 

अपराध नियंत्रण एवं आपराधिक न्याय पर संयुक्त राष्ट्र के आयोग (यूएनसीसीपीसीजे) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर आतंकवाद जैसी आपराधिक गतिविधियों के लिए नक्काली आय का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। आतंकी संगठन नकली सामान बना रहे हैं और अपनी आपराधिक गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए एक से दूसरे देश में उनकी तस्करी कर रहे हैं। रिपोर्ट में इस बात को भी रेखांकित किया गया है कि नक्काली और पायरेसी के कारण 2013 में वैश्विक स्तर पर 20 से 26 लाख लोगों का रोजगार छिना था और 2022 तक इससे 42 से 54 लाख तक रोजगार छिनने का अनुमान है, जो कि 110 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।


 
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पिछले 20 साल

FICCI
100 गुना बढ़ी है नक्काली की गतिविधि पिछले 20 साल में 

फिक्की कास्केड के सलाहकार एवं सीबीईसी के पूर्व चेयरमैन पीसी झा ने कहा कि पिछले बीस साल के दौरान नक्काली की गतिविधियों में 100 गुने की बढ़ोतरी हुई है और नकली वस्तुओं के कारोबार का आकार वैध अंतरराष्ट्रीय कारोबार के 10 फीसदी के बराबर (दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था के करीब 2 फीसदी के बराबर) है। 

अवैध कारोबार की समस्या सामान्य अनुमान से कहीं ज्यादा गंभीर है। इसका देश की सुरक्षा व अर्थव्यवस्था, सरकार के राजस्व, लोगों की सेहत और साथ ही पर्यावरण पर भी गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसमें भी कोई संदेह नहीं कि तस्करी किए हुए, नकली और जाली उत्पादों के कारोबार से पैदा होने वाला अवैध पैसा आतंकवाद, अशांति और अन्य संस्थागत अपराधों जैसी खतरनाक गतिविधियों के वित्तपोषण का बड़ा स्रोत है।
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