ईडी ने सीबीआई, एसीबी, चंडीगढ़ की एफआईआर के आधार पर मेसर्स सनस्टार ओवरसीज लिमिटेड (एसओएल), इसके पूर्व निदेशकों रोहित अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, सुमित अग्रवाल और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक गबन, आपराधिक विश्वासघात एवं धोखाधड़ी के मामले की जांच शुरु की थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम जोनल कार्यालय ने मेसर्स सनस्टार ओवरसीज लिमिटेड और अन्य के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, अमृतसर और ग्रेटर नोएडा में स्थित 28.36 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है। ईडी ने सीबीआई, एसीबी, चंडीगढ़ की एफआईआर के आधार पर मेसर्स सनस्टार ओवरसीज लिमिटेड (एसओएल), इसके पूर्व निदेशकों रोहित अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, सुमित अग्रवाल और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक गबन, आपराधिक विश्वासघात एवं धोखाधड़ी के मामले की जांच शुरु की थी। जांच एजेंसी ने करूर व्यास बैंक के नेतृत्व में 9 ऋणदाता बैंकों के संघ को 950 करोड़ रुपये से अधिक का गलत नुकसान पहुंचाने की जांच को भी इसमें शामिल किया था।
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ईडी की जांच से पता चला है कि एसओएल के पूर्व निदेशकों/प्रवर्तकों ने संबंधित/नियंत्रित/लाभकारी स्वामित्व वाली संस्थाओं, शेल इकाई और डमी इकाई के जाल के माध्यम से एसओएल द्वारा प्राप्त ऋण राशि को लूटा। जांच से यह भी पता चला है कि एसओएल के पूर्व निदेशकों/प्रवर्तकों ने (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) एनसीएलटी की कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) कार्यवाही का दुरुपयोग करके वास्तविक और अप्रत्यक्ष नियंत्रण हासिल कर लिया।
जांच के दौरान, ईडी ने जनवरी 2024 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी ली और 1.19 करोड़ रुपये नकद और 226 ग्राम सोना जब्त किया। जुलाई, 2024 में, ईडी ने तीन प्रमुख व्यक्तियों राकेश गुलाटी (सीए), परमजीत शर्मा और अजय यादव (एसआरए) को पीएमएलए की धारा 19 के तहत पूर्व निदेशकों/प्रमोटरों के साथ ऋण राशि के षड्यंत्र और उपरोक्त डायवर्जन में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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इसके अलावा, ईडी ने अगस्त 2024 में इस मामले में 294 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति भी कुर्क की है, जिसकी पुष्टि एलडी एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी (पीएमएलए) ने की है। निष्कर्षों के आधार पर, पिछले साल 29 अगस्त को पीएमएलए की धारा 44 और 45(1) के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की गई। इसका संज्ञान 25 सितंबर 2024 को दिल्ली के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट, तीस हजारी कोर्ट के विशेष न्यायालय (पीएमएलए) द्वारा लिया गया।
आगे की जांच के दौरान, ईडी ने पता लगाया कि अपराध की अतिरिक्त आय को उसकी संबंधित इकाई- स्टार ट्रैक फास्टनर्स प्राइवेट लिमिटेड और पूर्व निदेशकों/प्रमोटरों और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा अर्जित अन्य संपत्तियों द्वारा गबन और उपयोग किया जा रहा था, जिन्हें अब गिरवी रख दिया गया है। मामले में अब तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 322.55 करोड़ रुपये है।