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IndiGo Crisis: भारत में पिछले 25 साल में कितनी विमानन कंपनियां बंद हुईं, इसके पीछे की वजह क्या रही?

Thu, 11 Dec 2025 03:12 PM IST
संध्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

इंडिगो की लगातार रद्द होती उड़ानों ने यात्रियों के लिए संकट पैदा कर दिया। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब भारत के विमानन क्षेत्र ने इतनी बड़ी उथल-पुथल हुई है। पहले भी भारत में विमानन कंपनियां संकट से गुजरती रही हैं। यहां तक कि बीते 25 साल में नौ विमानन कंपनियां बंद हो चुकी हैं। 

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नौ बंद हुई भारतीय उड़ाने - फोटो : नौ बंद हुई भारतीय उड़ाने
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विस्तार
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इंडिगो की लगातार रद्द होती फ्लाइटों ने यात्रियों के लिए संकट की स्थिति पैदा कर दी है। डीजीसीए की तरफ से नवंबर में लाए गए नियमों के तहत सही इंतजाम न कर पाने के बाद एयरलाइन के लिए यह संकट पैदा हुआ। हालांकि, बाद में यात्रियों की परेशानी बढ़ने के बाद नियमों को अस्थायी तौर से वापस ले लिया गया। संसद में नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि मामले में जवाबदेही तय की जाएगी। जब से यह संकट पैदा हुआ है, तब से इंडिगो पांच हजार से ऊपर उड़ानें रद्द कर चुका है। उड़ानों के रद्द होने से इंडिगो को आर्थिक तौर पर भी नुकसान उठाना पड़ा है। इंडिगो भारत के विमान बाजार में 60 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। 

इंडिगो भारत में काफी किफायती कीमतों पर घरेलू उड़ानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी मुहैया कराता है। लेकिन नियमों का सबसे ज्यादा असर इंडिगो पर ही देखने को मिला। यह पहली बार नहीं है, जब भारत की कोई एयरलाइन इतनी ऊंचाइयों को छूने के बाद अचानक जमीन पर गिर गई। पिछले 25 वर्षों में नौ प्रसिद्ध एयरलाइंस को वित्तीय संकट के आगे घुटने टेकने पड़े हैं। 

आइए जानते है भारत की कौन सी एयरलाइंस पिछले 25 वर्षों में बंद हुई? इसकी क्या वजह थी? इंडिगो का संकट भी क्या इसी तरह के खतरे की घंटी है?

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भारत की कौन सी एयरलाइंस पिछले 25 वर्षों में बंद हुई?

एयर सहारा

एयर सहारा लिमिटेड भारत की एक जानी-मानी प्राइवेट एयरलाइन थी, जिसका मालिकाना हक सहारा इंडिया परिवार ग्रुप के पास है। यह 115 घरेलू उड़ान संचालित करती थी। इसे 2003 में पड़ोसी देशों के लिए उड़ान भरने की इजाजत मिली थी। भारत सरकार ने 1990 के दशक में अपना घरेलू एयर मार्केट प्राइवेट एयरलाइन कंपनियों के लिए खोल दिया था। नई एयरलाइन बनाने वाली पहली कंपनियों में से एक सहारा इंडिया परिवार ग्रुप था। इस एयरलाइन का शुरूआत दो बोइंग 737-200 एयरक्राफ्ट के साथ हुई। 2000 में सहारा एयरलाइन को एयर सहारा के तौर पर फिर से लॉन्च किया गया। 2004 में  इसने अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी कदम रखा। 

फुल-सर्विस मॉडल में आने के बाद एयरलाइन को घाटा होना शुरू हुआ। इससे लागत बढ़ने लगी और बढ़ते कॉम्पिटिशन की वजह से टिकट की कीमतों पर दबाव बनने लगा। एयर डेक्कन जैसी नई लो-कॉस्ट कैरियर बहुत सस्ते किराए पर उड़ानें दे रही थी। इससे दूसरी एयरलाइन पर भी कीमतें कम करने का दबाव बना। फ्यूल की लागत तेजी से बढ़ी, एयरपोर्ट चार्ज बढ़े और प्रॉफिट मार्जिन कम हो गया। 2006 तक एयर सहारा घाटे में जाने लगी। अप्रैल 2007 में, जेट एयरवेज ने इसे 1450 करोड़ रुपये में इसे अधिग्रहित कर लिया। इसके बाद एयर सहारा को जेटलाइट के रूप में नए सिरे से शुरू किया गया। अप्रैल 2019 में जेटलाइट और जेट एयरवेज दोनों एक साथ बंद हो गए। इसके साथ ही एयर सहारा का अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो गया। 

 

एयर डेक्कन

2005 में, रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर जी.आर. गोपीनाथ ने घोषणा की कि वे भारतीयों को एक रुपये से भी कम में हवाई यात्रा की सुविधा देंगे। यह हैं देश की पहली बजट एयरलाइन एयर डेक्कन के संस्थापक। अगस्त 2003 में उन्होंने एयर डेक्कन की शुरुआत की, जिसके पास छह 48-सीटर ट्विन-इंजन फिक्स्ड-विंग टर्बोप्रॉप एयरक्राफ्ट का बेड़ा था, और दक्षिणी शहरों हुबली और बंगलूरू के बीच रोज एक फ्लाइट थी। 2007 तक एयरलाइन 67 एयरपोर्ट से रोज 380 फ्लाइट चला रही थी। फ्लीट बढ़कर 45 प्लेन का हो गया था। हर दिन पच्चीस हजार पैसेंजर बजट फ्लाइट में उड़ रहे थे, जबकि एयरलाइन शुरू होने के समय यह संख्या 2,000 थी। 

लेकिन एयर डेक्कन को घाटा बढ़ने के साथ-साथ खर्चों का सामना करना पड़ा। 2007 में कैप्टन गोपीनाथ ने अपनी कंपनी किंगफिशर को बेच दी, जिसके मालिक शराब के बड़े कारोबारी विजय माल्या थे, जो किंगफिशर एयरलाइंस के भी मालिक थे। विजय माल्या ने एयर डेक्कन का नाम बदलकर किंगफिशर रेड कर दिया।

पैरामाउंट एयरवेज

पैरामाउंट एयरवेज की शुरुआत 2005 में हुई थी। मदुरै की टेक्सटाइल कंपनी पैरामाउंट ग्रुप ने चेन्नई से इसकी शुरुआत की थी। यह पहली एयरलाइन थी, जिसने बिजनेस क्लास के यात्रियों पर फोकस किया। इसके लिए नई पीढ़ी के एम्ब्रायर 170/190 फैमिली सीरीज के एयरक्राफ्ट लॉन्च किए गए थे। लेकिन 2010 में सरकार ने इसका लाइसेंस रद्द कर दिया। यह एयरलाइन बाकी कंपनियों की तरह सस्ती फ्लाइट देने के चक्कर में नहीं डूबी। यह एयरलाइन सिर्फ एक विमान उड़ा रही थी। जिसके बाद डीजीसीए ने नेशनल एयरलाइन लाइसेंस की वैधता पर सवाल उठाया, क्योंकि नेशनल परमिट के लिए कम से कम पांच एयरक्राफ्ट वाले ऑपरेशनल फ्लीट की जरूरत होती है। इसलिए एयरलाइन के लाइसेंस को रद्द करना पड़ा। 

किंगफिशर एयरलाइन

2005 में शराब कारोबारी विजय माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस की शुरुआत की थी। इस एयरलाइन ने भारत में प्रीमियम हवाई यात्रा देने का वादा किया था। 2008 में इसने बंगलूरू को लंदन अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरी। अपने बेड़े में और अधिक विमान जोड़ने के लिए इसने 2007 में डूबती हुए एयरलाइन एयर डेक्कन का भी अधिग्रहण किया। 

भारतीय एयरलाइन उद्योग की प्रकृति बेहद प्रतिस्पर्धी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, किंगफिशर ने दर्जनों विमान पट्टे (लीज) पर लिए या खरीदे, हर वर्ष पट्टे की लागत 900-1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। विमानन टर्बाइन ईंधन की अधिक कीमत भी एयरलाइन पर भारी पड़ी। हालांकि, बाद में कई परिचालन संबंधी गलतियां, बढ़ते कर्ज और बाजार के दबाव जैसे कारणों की वजह से एयरलाइन को बंद होना पड़ा।  

2009 में किंगफिशर के पास पैसों की समस्या होने लगी। 2011 में, यह संकट और अधिक गहराता चला गया। 2012 तक, किंगफिशर के बेड़े में कमी आ गई और भुगतान में देरी के कारण कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। चेक बाउंस होने के कारण गैर-जमानती वारंट जारी हुए, और 950 करोड़ रुपये के आईडीबीआई के बड़े ऋणों ने सीबीआई को इसमें शामिल किया। किंगफिशर एयरलाइन ने 2012 में उड़ानें बंद कर दी। 

 

जेट एयरवेज  

1992 में भारत ने निजी एयरलाइन के लिए हवाई मार्ग खोलने शुरू किए। इसी साल नरेश गोयल ने जेट एयरवेज की स्थापना की। वे पहले एक ट्रेवल एजेंट हुआ करते थे। जेट एयरवेज की शुरुआत 1993 में एक एयर-टैक्सी ऑपरेटर के रूप में हुई थी। यह एयरलाइन उद्योग में उस समय एक निजी एयरलाइन बनकर उभरी, जब देश में सरकारी कंपनियों का दबदबा था। 2004 में इसकी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू हुई। एयरलाइन की मुश्किलें तब बढ़ीं जब उसने ऐसे मार्केट में फुल-सर्विस मॉडल बनाए रखा, जहां आसानी से सस्ती फ्लाइट मिल रही थीं। फ्लाइट के अंदर खाना, ऑपरेटिंग का खर्चा और तेजी से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को बढ़ाना, एयरलाइन पर आर्थिक दबाव डालने लगा। इंडिगो और स्पाइसजेट की सस्ती उड़ानों ने इसकी कमर तोड़ दी। 2010 के आखिर तक कर्ज बढ़ने लगा और स्टाफ को वेतन देने में देरी होने लगी।  

जेट एयरवेज ने 2007 में दिवालिया हो रही एयर सहारा का 1,450 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया। लेकिन यह अधिग्रहण सफल नहीं रहा। अप्रैल 2019 तक एयरलाइन के पास पूरे पैसे खत्म हो गए। 17 अप्रैल को, जेट एयरवेज़ ने अपनी अंतिम उड़ान को संचालित किया। बाद में, कंपनी ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि ईंधन और आवश्यक सेवाओं के लिए पैसो की कमी के कारण वह अपना परिचालन बंद कर रही है।

 

ट्रू जेट

TruJet, ने जुलाई 2015 से अपनी उड़ाने शुरू की थी और उसके पास सात जहाज थे। वह सबसे लंबे समय से सेवा दे रही क्षेत्रीय कंपनी थी। इसे हैदराबाद के एविएशन ग्रुप टर्बो मेघा एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड ने शुरू किया था। एयरलाइन को शुरू करने का मकसद टियर-2 और टियर-3 शहरों, खासकर दक्षिण भारत के शहरों को जोड़ना था, जहां से विमान संपर्क बहुत कम था। 2016 में, भारत सरकार ने सब्सिडी, टैक्स में छूट और कम एयरपोर्ट चार्ज के जरिए रीजनल एयर कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) स्कीम लेकर आई। ट्रूजेट को भी इसमें शामिल किया गया। 

भारत में रीजनल उड़ाने आमतौर बहुत ज्यादा मुनाफे पर नहीं चलती है जिसके कारण बंद होने की संभावना अधिक होती है। इसका कारण पैसेंजर डिमांड, छोटे रूट और एयरक्राफ्ट लीजिंग, मेंटेनेंस और फ्यूल जैसे ज्यादा फिक्स्ड कॉस्ट होते हैं। यह विमान बहुत ज्यादा उड़ान सब्सिडी पर निर्भर था। जिसमें सरकार का तरफ से देरी से पैसे मिलने पर आर्थिक संकट के कारण उसे नुकसान में काम करना पड़ता था। कोविड के दौरान उड़ाने रूक गई जिससे इसकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह से खराब हो गई थी। 

गो फर्स्ट 

गो फर्स्ट ने 2005 में इंडिगो और स्पाइसजेट के साथ ही उड़ान शुरू की थी। जनवरी 2025 में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने बजट एयरलाइन गो फर्स्ट एयरवेज के परिसमापन का आदेश दिया। इसका मतलब कि कंपनी को अपनी संपत्तियां बेचकर कर्ज चुकाने को कहा गया। वित्तीय समस्याओं के कारण विमानन कंपनी ने मई, 2023 में स्वैच्छिक रूप से दिवालिया समाधान प्रक्रिया के लिए आवेदन किया था। गो फर्स्ट का परिचालन तीन मई, 2023 से बंद है। कंपनी ने 2005-06 में मुंबई से अहमदाबाद के लिए पहली उड़ान के साथ घरेलू परिचालन शुरू किया था। 2018-19 में अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू की थी।  पीडब्ल्यू 'इंजन की परेशानी' के चलते उड़ानें रद्द हुई, जिसके बाद कंपनी को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। 

विस्तारा

विस्तारा की शुरुआत जनवरी 2015 में हुई थी। इसके विलय के साथ ही भारतीय एयरलाइन कारोबार में फुल सर्विस एयरलाइन की संख्या घटकर केवल एक रह जाएगी। विस्तारा का संचालन टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस के बीच संयुक्त उद्यम रूप में हो रहा था। 11 नवंबर 2024 को इसने अपनी आखिरी उड़ान भरी थी। मई 2024 में एयरलाइन के पास क्रु की कमी होने के कारण 100 से अधिक फ्लाइट को रद्द करना पड़ा था। इसके बाद एयर इंडिया में इसका विलय हो गया। 

एआईएक्स कनेक्टस

पहले एयरएशिया इंडिया के नाम से मशहूर एआईएक्स कनेक्ट को टाटा ग्रुप के एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ विलय किया गया। 2024 से, एआईएक्स कनेक्ट के ऑपरेशन और एयरक्राफ्ट एयर इंडिया एक्सप्रेस में शामिल कर दिए गए थे। 

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क्या इंडिगो संकट भी इसी दिशा में संकेत कर रहा है

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इंडिगो एयरलाइन की उड़ानों में 10% कटौती करने का कड़ा निर्देश दिया है। पिछले हफ्ते सरकार की तरफ से जारी किए गए नियमों के बाद इंडिगो में काफी कुप्रबंधन देखने को मिला। मंत्रालय का कहना है कि एयरलाइन के संचालन को स्थिर करने और उड़ाने रद्द करने की घटनाओं को कम करने के लिए यह कटौती जरूरी है। मंत्रालय ने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि 10% की कटौती का उद्देश्य एयरलाइन के सिस्टम पर दबाव कम करना है ताकि जो भी उड़ानें शेड्यूल में रहें, वे समय पर चल सकें। इंडिगो को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह उच्च मांग वाले रूट्स पर भी संचालन को सुचारू रखें और किसी भी सेक्टर पर सेवा पूरी तरह बंद न करे। इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स से भी इस मामले पर जवाब मांगा गया है। इंडिगो इस समय भारतीय बाजार में एक मात्र ऐसी फ्लाइट है जो कम दामों में लोगों को उड़ाने दे रही है। नए नियम आने के बाद भी इंडिगो के यात्रियों की सबसे ज्यादा फ्लाइट रद्द हुई। जिससे साफ है कि अभी इंडिगो की भारतीय बाजार में अच्छी पकड़ है। 

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