महाराष्ट्र के पुणे में कोरोना संकट के बीच 85 वर्षीय शांताबाई पवार दो समय की रोजी-रोटी के लिए सड़कों पर 'लाठी काठी' का करतब करती नजर आईं। इस करतब को देखकर हर कोई हैरान है। लोगों का कहना था कि इतनी उम्र में इस तरह की ऊर्जा वाकई हैरान करने वाली है।
जब लोगों ने उनसे पूछा कि वह कब से यह करतब कर रही हैं तब वह कहती हैं कि मैं यह करतब उस समय से कर रही हूं, जब मैं आठ साल की थी। मेरे पिता ने मुझे कड़ी मेहनत करना सिखाया था। इस वक्त लोग ज्यादातर कोरोना के कारण घर के अंदर ही रहते हैं, इस दौरान मैं करतब दिखाने के साथ उन्हें सचेत भी करती हूं।
इन दिनों भी सड़कों पर शांताबाई के करतब को देखने के लिए काफी भीड़ उमड़ रही है। सभी लोग उनके करतब को काफी पसंद कर रहे हैं। 85 साल की उम्र में भी उनके करतब हैरतअंगेज हैं।
उनके करतब न केवल प्रशंसा मिली, बल्कि कई लोग आर्थिक सहायता देने के लिए भी आगे आए, जिनमें से फिल्म अभिनेता रितेश देशमुख ने उन्हें माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट पर "योद्धा आजी" (योद्धा दादी) के रूप में संबोधित कर सराहना की और उनसे संपर्क किया।
पवार ने कहा कि उन्होंने आठ साल की उम्र से लाठी-काठी चलाने का कौशल सीखना शुरू कर दिया था और इसे प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न स्थानों की यात्रा की, लेकिन लॉकडाउन के चलते सब बहुत मुश्किल हो रहा था।
उन्होंने आगे कहा, कि दुकान वालों ने मुझे किराना सामान देना बंद कर दिया। चूंकि एक बड़े परिवार में इतने सारे बच्चे थे जिनका पेट भरना मुश्किल हो रहा था, इसलिए मैंने सड़कों पर अपने करतब को दिखाने का फैसला किया, ताकि मेरे करतब को देखकर लोग मुझे पैसे दे सकें। आर्थिक सहायता मिलने से परिवार के सारे सदस्य खुश नजर आ रहे थे।