हम्पी में स्थित विरुपाक्ष मंदिर में भगवान शिव की पूजा होती है। विरुपाक्ष मंदिर को अक्सर 'दक्षिण काशी' के रूप में जाना जाता है। यहां हर दिन कम से कम 5,000 भक्त आते हैं।
हम्पी में सातवीं शताब्दी के विरुपाक्ष मंदिर में केले पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंदिर प्रशासन ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले भक्त मंदिर के हाथी को जरूरत से ज्यादा केले खिला देते हैं। इसके साथ ही पूजा स्थल पर भी केले के छिलके फैला देते हैं। ऐसे में मंदिर, हाथी और भक्तों की भलाई को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
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मंदिर बंदोबस्ती अधिकारी ने बताया कारण
मंदिर बंदोबस्ती अधिकारी हनुमंतप्पा ने यह भी बताया कि हमने देखा कि भक्त हाथी को खिलाने के चक्कर में अति उत्साही हो जाते हैं। यह न केवल मंदिर के हाथी के लिए हानिकारक है, बल्कि यह जगह को बहुत गंदा भी करता है। भक्त केले के छिलके और यहां तक कि प्लास्टिक की थैलियां भी छोड़ जाते हैं। मंदिर के अधिकारियों ने यह भी कहा कि जब से प्रतिबंध की रिपोर्ट सामने आई है, उनके पास इस बारे में जानकारी के लिए बहुत सारे लोग संपर्क कर रहे हैं।
प्रतिबंध की जानकारी देते हुए हनुमंतप्पा ने लोगों से अपील की कि मंदिर में केले पर लगाए गए प्रतिबंध को संदर्भ से बाहर न लें। उन्होंने कहा कि इसमें विवाद जैसा कुछ नहीं है। यह एक स्थानीय मामला है। हमने यह निर्णय पूरी तरह से हमारे मंदिर परिसर के अंदर की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए लिया है।
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'दक्षिण काशी' के रूप में जाना जाता है विरुपाक्ष मंदिर
हम्पी में स्थित विरुपाक्ष मंदिर में भगवान शिव की पूजा होती है। विरुपाक्ष मंदिर को अक्सर 'दक्षिण काशी' के रूप में जाना जाता है। यहां हर दिन कम से कम 5,000 भक्त आते हैं। वहीं, विशेष पूजा दिनों और वीकेंड पर यहां आने वाले लोगों की संख्या और भी बढ़ जाती है। ऐसे दिनों में यहां प्रतिदिन 50,000 तक श्रद्धालु पहुंचते हैं।