भारत में पिछले आठ साल में शिकार और अन्य कारणों से 750 बाघ मारे गए हैं। मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 173 बाघों की मौत हुई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।
एनटीसीए द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पिछले आठ साल में मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 173 बाघों की मौत हुई। इनमें से 38 बाघों की मौत शिकार की वजह से, 94 बाघों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई और 19 बाघों की मौत का मामला अभी जांच के दायरे में है। छह बाघों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई और 16 अवशेष भी मिले।
मध्यप्रदेश में देश में सर्वाधिक 526 बाघ हैं। प्राप्त सूचना के अनुसार, पिछले आठ साल में बाघों की मौत के मामले में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर रहा जहां 125 बाघों की मौत हुई। इसके बाद कर्नाटक में 111, उत्तराखंड में 88, तमिलनाडु में 54, असम में 54, केरल में 35, उत्तर प्रदेश में 35, राजस्थान में 17, बिहार और पश्चिम बंगाल में 11 तथा छत्तीसगढ़ में 10 बाघों की मौत हुई है। एनटीसीए ने कहा कि इस अवधि में ओडिशा और आंध्र प्रदेश में सात-सात, तेलंगाना में पांच, दिल्ली और नगालैंड में एक-एक, आंध्र प्रदेश, हरियाणा तथा गुजरात में एक-एक बाघ की मौत हुई है।
इसने शिकार की वजह से बाघों की मौत का विवरण साझा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में 28-28 बाघ शिकार की वजह से मारे गए। असम में 17, उत्तराखंड में 14, उत्तर प्रदेश में 12, तमिलनाडु में 11, केरल में छह और राजस्थान में तीन बाघों की मौत शिकार की वजह से हुई। एनटीसीए ने आरटीआई आवेदन के जवाब में शिकार के चलते बाघों की मौत के मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी नहीं दी।