कांग्रेस ने तेलंगाना में वोटिंग लिस्ट की जांच को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखने के बाद फर्जी वोटर शामिल करने के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने इसे केसीआर सरकार का ‘जादुई गणित’ करार दिया है।
मतदाता सूची चुनावों का हॉलमार्क
चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने रविवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि तेलंगाना की सभी विधानसभाओं में कराए गए सेंपल सर्वे में कुल वोटर लिस्ट में 20 फीसदी फर्जी वोटर हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में 70 लाख फर्जी वोटर हैं। सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 40 साल पहले अपने आदेश में कहा था कि चुनावों की शुद्धता लोकतंत्र का सार है और मतदाता सूची इसकी शुद्धता का हॉलमार्क है। लेकिन, राज्य की केयरटेकर सरकार अपने राजनीतिक हित साधने के लिए चुनावी अंखडता को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
70 लाख डुप्लीकेट वोटर
राजस्थान से राज्यसभा सांसद सिंघवी ने तेलंगाना सरकार पर पहला आरोप लगाया कि 10 सितंबर को जारी मतदाता सूची में 70 लाख लोगों में से 30.13 लाख वोटर डुप्लीकेट हैं, जिनकी आयु, नाम और लिंग समान हैं। इनमें 19 लाख वोटर ऐसे हैं, जिनके पति या पिता का नाम एक ही है।
घट गए 20 लाख वोटर
सिंघवी ने राज्य सरकार पर दूसरा आरोप लगाते हुए कहा कि 2014 से लेकर 2018 के बीच 20 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। कांग्रेस के मुताबिक राज्य में 2014 में 2.81 करोड़ मतदाता थे, लेकिन 2018 की सूची में घट कर 2.61 करोड़ हो गए। पार्टी ने बताया कि राज्य निर्वाचन अधिकारी का कहना है इनमें से अधिकांश वोटर विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश पलायन कर गए। सिंघवी के मुताबिक जब उनकी टीम ने आंध्र प्रदेश की वोटर लिस्ट की जांच की तो वहां 17 लाख वोटर कम मिले।
खम्मम जिले से 1 लाख वोट ट्रांसफर
कॉन्फ्रेंस में सिंघवी ने तेलंगाना सरकार पर तीसरा आरोप लगाया कि केवल खम्मम जिला ही आंध्र प्रदेश को ट्रांसफर हुआ है। खम्मम में 7 मंडल हैं और एक लाख से ज्यादा मतदाता ही ट्रांसफर किए गए। लेकिन, इन वोटरों को तेलंगाना की मतदाता सूची से हटाना नहीं दिखाया गया है। ऐसे में दोनों राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के बयानों पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयोग से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि प्रकाशित सूची में ये मतदाता कहां से तालुल्क रखते हैं।
4 महीने का काम 4 हफ्तों में
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिंघवी ने तेलंगाना के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने जल्द चुनावों को लेकर इतनी जल्दबाजी दिखाई कि चार से पांच महीने का काम चार हफ्तों में निपटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे साफ होता है कि केसीआर ने बिना किसी अथॉरिटी से पूछे अचानक ही विधानसभा भंग करके जल्द चुनाव कराने का फैसला किया। सिंघवी ने केसीआर पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने 2015 में ग्रेटर हैदराबाद निगम चुनावों में 15 लाख मतदाताओं के नाम हटवाए थे। क्योंकि वे मतदाता केसीआर की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति को वोट नहीं करते थे। कांग्रेस के प्रयासों के बाद उन्हें यह फैसला वापस लेना पड़ा।
संविधान की मूलभूत अवधारणा का उल्लंघन
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से अपील की है कि 70 लाख फर्जी वोटरों के नाम शामिल होने की प्रक्रिया की जल्द से जल्द जांच करें। साथ ही संविधान की धारा 324 के तहत मतदाता सूची की पवित्रता बनाए रखना सुनिश्चित करे और इस गंभीर मद्दे पर शांत बैठने की बजाए कार्रवाई करे। साथ ही सिंघवी ने कहा कि यह संविधान की मूलभूत अवधारणा का उल्लंघन है और सही मतदाता सूची प्रकाशित करने की मांग की। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता कमलनाथ और सचिन पायलट ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा था कि कोर्ट चुनाव आयोग को निर्देश दे कि वो मध्यप्रदेश और राजस्थान में फ्री एंड फेयर चुनाव कराने के लिए बोगस वोटरों को लिस्ट से हटाए, जिसमें आखिरी सुनवाई 10 सितंबर को हुई थी।
बीएलओ करते हैं गड़बड़ियां
चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि इस तरह की गड़बड़ियां बूथ लेवल ऑफिसर के स्तर की जाती हैं। उन्होंने बताया कि अंतिम समय में जब फाइनल ड्राफ्ट लिस्ट जारी की जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी बीएलओ पर आती है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की तरफ से स्पष्ट निर्देश हैं कि चुनावों से पहले ही बीच-बीच में मतदाता सूची को अपडेट करने का काम शुरू कर दिया जाए, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं होता। उन्होंने कहा कि तेलंगाना मामले में भी ऐसा ही हुआ है, जल्दबाजी में मतदाता सूची तैयार की गई। उन्होंने हाल ही हुए उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की वोटर लिस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि अभिनेत्री सनी लियोनी की फोटो लगाने की चूक भी उसी स्तर पर हुई थी, जिसके बाद एक कॉन्ट्रैक्ट वर्कर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराते हुए उसकी सेवा समाप्ति की सिफारिश की गई।
केसीआर के सपनों पर पानी फेरना चाहती है कांग्रेस
माना जा रहा है कि कांग्रेस वोटर लिस्ट में सशोधन के बहाने के चंद्रशेखर राव के प्लान पर पानी फेरना चाहती है क्योंकि लिस्ट में संशोधन में कम से कम तीन महीने का समय लग सकता है। इससे पहले कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत को पत्र लिख कर कहा था कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में फर्जी मतदाता पहचान पत्र बड़ी संख्या में मिले थे। और राव चाहते हैं कि इन तीनों राज्यों के साथ ही तेलंगाना में भी चुनाव हो। कांग्रेस ने मांग की कि जैसे अन्य राज्यों में फर्जी मतदाता पहचान पत्र पाए गए हैं, उसी तरह यहां भी हो सकते हैं।
दावा या आपत्तियां 10 सितंबर से 25 सितंबर तक
इससे पहले तेलंगाना का राज्य निर्वाचन आयोग 10 सितंबर को मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित ककर चुका है। ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद सूची में दावा या आपत्तियों को लेकर 10 सितंबर से 25 सितंबर तक संपर्क किया जा सकता है। वहीं 04 अक्टूबर तक सभी दावा और आपत्तियों का निस्तारण कर दिया जाएगा। जिसके बाद डाटाबेस को अपडेट और सप्लिमेंट सूची का प्रकाशन 07 अक्टूबर से पहले ही पूरा हो जाएगा और 08 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।
मध्य प्रदेश व राजस्थान में भी की थी फर्जी वोटर्स की शिकायत
इससे पहले कांग्रेस ने मध्यप्रदेश और राजस्थान में चुनाव आयोग से फर्जी वोटरों को लेकर शिकायत की थी। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की मतदाता सूची को लेकर कहा था कि वोटर लिस्ट में 60 लाख फर्जी वोटर जोड़े गए हैं। कांग्रेस का दावा था कि 5 करोड़ की आबादी वाले मध्य प्रदेश में 12-13 फीसदी वोटर फर्जी हैं। वहीं राजस्थान में कांग्रेस ने दावा किया था कि साल 2013 से लेकर 2018 तक राज्य में 45 लाख फर्जी वोटर्स जोड़े गए हैं।