अगला मामला पारसी महिला के गैर-पारसी परिवार में शादी के बाद धार्मिक पहचान को लेकर है। एक पारसी महिला ने गैर-पारसी लड़के से शादी की थी। जिसके बाद उन्हें एक पारसी मंदिर में प्रवेश देने से मना कर दिया गया। इसका महिला ने विरोध किया था. इसके बाद मामला गुजरात हाई कोर्ट में गया जहां महिला की याचिका को खारिज कर दिया गया था।
व्यभिचार पर दंडनीय कानून की वैधता
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आईपीसी की धारा 497 के तहत व्यभिचार में केवल पुरुषों के लिए सज़ा के प्रावधान को चुनौती दी गई है। इस कानून के तहत शादी के बाद संबंध पाए जाने पर सिर्फ पुरुष अपराधी ठहराया जा सकता है महिला नहीं। हालांकि, ये कानून कहता है कि अगर कोई पुरुष किसी शादीशुदा महिला से बिना उसके पति की सहमति से संबंध बनाता है तो उस पुरुष को इस धारा के तहत सजा हो सकती है।
सांसदों/विधायकों पर आपराधिक मामले
इस मामले में याचिका दायर की गई है कि जिन सांसदों या विधायकों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं उन्हें ट्रायल कोर्ट में आरोप निर्धारित होने के साथ ही अयोग्य करार दे देना चाहिए।
वर्तमान कानून के मुताबिक कोई सांसद या विधायक किसी मामले में दोषी होने पर सजा की अवधि के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता है। इसके अलावा संवैधानिक पीठ टैक्स और उपभोक्ता कानून से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई करेगी।