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छठा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: जानें इस खास दिन के इतिहास, महत्व और थीम के बारे में सबकुछ

Sat, 20 Jun 2020 10:54 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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International Yoga Day 2020 - फोटो : अमर उजाला
कोरोना महामारी से जूझ रही पूरी दुनिया एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए तैयार है, हालांकि हर बार की तुलना में इस बार की स्थिति बिल्कुल अलग है। वैश्विक महामारी से बचाव और रोकथाम के लिए दुनियाभर में इस वक्त स्वास्थ्य गतिविधियों को काफी तवज्जो दी जा रही है। इस वैश्विक महामारी से रोकथाम के लिए स्वास्थ्य संगठन और चिकित्सक लोगों को अपनी शारीरिक और मानसिक स्थिति को मजबूत करने और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने के लिए योग जैसे पौराणिक व्यायाम को करने का सुझाव दे रहे हैं।

योग एक प्राचीन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास है जिसकी उत्पत्ति भारत में करीब पांच हजार साल पहले हुई थी। 'योग' शब्द संस्कृत से निकला है और इसका मतलब होता है शरीर और चेतना को एक साथ मिलाना। 21 जून, 2020 को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। यह छठा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है।
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Pm modi on world yoga day(file photo - फोटो : पीटीआई
कब और कहां-कहां हुआ आयोजन
संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषणा के बाद 21 जून, 2015 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था। इस दिन दुनियाभर में विभिन्न योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। 
  • पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन 21 जून, 2015 को दिल्ली के राजपथ पर किया गया था।
  • दूसरे एवं तीसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों का आयोजन क्रमश: 2016 में चंडीगढ़ तथा 2017 में लखनऊ में किया गया था।
  • चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन देहरादून में किया गया।
  • पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन झारखंड की राजधानी रांची में किया गया था।
  • इस बार छठे अंतरराष्ट्रीय दिवस का आयोजन पहली बार ऑनलाइन किया जाएगा।

21 जून को ही क्यों चुना गया?
इस दिवस के लिए 21 जून की तारीख का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह दिन उत्तरी गोलार्द्ध (ग्रीष्मकालीन संक्रांति) का सबसे लंबा दिन होता है जिसका दुनिया के कई हिस्सों में विशेष महत्त्व है, साथ ही आध्यात्मिक कार्यों के लिए भी यह दिन विशेष महत्त्व रखता है। दरअसल भारतीय मान्यता के अनुसार आदि योगी शिव ने इसी दिन मनुष्य जाति को योग विज्ञान की शिक्षा देनी शुरू की थी, जिसके बाद वे आदि गुरू बने। स्मरणीय हो कि विश्व का पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईवाईडी) 21 जून 2015 को मनाया गया था।

कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?
11 दिसंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 178 सदस्यों द्वारा 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई थी। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव को 90 दिनों के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव को मंज़ूर करने के संदर्भ में लिया गया यह सबसे कम समय है। 

योग की महत्ता को विश्व में ख्याति दिलाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मनाने का विचार सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित किया गया था। बाद में दिसंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र की ‘वैश्विक स्वास्थ्य और विदेश नीति’ की कार्यसूची के तहत अपनाया गया था। विदित हो कि अमेरिका, कनाडा, चीन एवं मिस्र सहित 178 देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था जोकि यूएनओ के इतिहास में अभूतपूर्व घटना थी। प्रस्ताव को महज 90 दिनों में पारित कर उसे लागू किया गया।
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संयुक्त राष्ट्र में पांचवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस - फोटो : Social Media
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बदलती रही है थीम 
2015: सद्भाव और शांति के लिए योग 
2016: युवाओं को कनेक्ट करें 
2017: स्वास्थ्य के लिए योग
2018: शांति के लिए योग
2019: पर्यावरण के लिए योग 
2020: घर में रहते हुए अपने परिवार के साथ योग करना

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yoga day - फोटो : amar ujala
योग का इतिहास
योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘युज’ शब्द से हुई है, जिसका मतलब जोड़ना, एकीकरण करना या बांधना होता है। आध्यात्मिक स्तर पर जुड़ने का अर्थ है आत्मा का सार्वभौमिक चेतना से मिलन होना वहीं व्यावहारिक स्तर पर योग को शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने तथा तालमेल बनाने का एक साधन माना जाता है।

ज्ञातव्य है कि आज से हजारों वर्ष पहले ही योग अस्तित्व में आ गया था। भारत में तो योग की शुरूआत करीब दस हजार साल पहले ही हो गई थी। वैदिक संहिताओं के अनुसार सप्तऋषियों में से एक अगस्त्य मुनि ने भारत में योग को जनजीवन का हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया। ईसा पूर्व दूसरी सदी में भारतीय महर्षि पतंजलि ने पतंजलि योग सूत्र पुस्तक लिखी। यह आधुनिक योग विज्ञान की अति महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है।

आधुनिक समय की बात करें तो 1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद को स्वामी विवेकानंद ने संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने उस समय के आधुनिक युग में पश्चिमी दुनिया को योग से परिचय करवाया था। वहीं परमहंस योगानंद ने 1920 में बोस्टन में क्रिया योग सिखाया था। उसके बाद कई गुरुओं और योगियों ने दुनियाभर में योग का प्रसार किया और बड़े पैमाने पर लोगों ने इसको स्वीकार करना शुरू किया। यहां तक की योग को एक विषय के रूप में भी अध्ययन किया जाने लगा।
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योग दिवस - फोटो : amar ujala
योग के विविध आयाम
हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा के बाद योग पद्धतियों के बारे में जागरूकता में इजाफा हुआ है। यूरोप, अमेरिका, एशिया आदि महाद्वीपों के विभिन्न देशों में इसकी बढ़ती लोकप्रियता इसे प्रमाणित कर रही है। अगर देखा जाए तो इसकी वजह योग का व्यक्ति से जुड़कर उसे शारीरिक व मानसिक स्तर पर स्वस्थ रखना है। सामान्यतः योग किसी व्यक्ति के शरीर, मन, संवेदना, संवेग के स्तर पर काम करता है।

ऐसे में मोटे तौर पर योग के चार वर्गीकरण हुए हैं-
  • कर्म योग: इसमें शरीर का उपयोग होता है।
  • ज्ञान योग: इसमें बुद्धि का उपयोग किया जाता है।
  • भक्ति योग: इसमें भावनाओं का उपयोग किया जाता है।
  • क्रिया योग: इस योग में ऊर्जा का उपयोग होता है।

व्यापक स्तर पर देखें तो प्रचलित योग साधनाएँ निम्न तरह की होती हैं-
  • यम: यह जीवन में अहिंसा, आत्मसंयम, सत्य इत्यादि पर जोर देती हैं।
  • नियम: इसके अंतर्गत पवित्रता, एकाग्रता और दृढ़ता जैसे नियमों के नित्य पालन पर बल दिया जाता है।
  • आसन: देह को अनुशासित करने के लिए शारीरिक अभ्यास पर बल देता है, जैसे योग मुद्राएँ, स्वास्थ्यवर्द्धन कृत्य आदि।
  • प्राणायाम: जीवन-शक्ति के संरक्षण के लिए श्वास का नियमन करने पर बल देता है।
  • प्रत्याहार: संवेदी अंगों के उपयोग को सीमित करता है अर्थात् बाहरी वस्तुओं से स्वयं को दूर रखने पर जोर देता है।
  • धारण: एक ही लक्ष्य पर ध्यान देने को महत्त्व देता है।
  • समाधि: ध्यान की वस्तु को चेतना के साथ विलय करता है। यह योग की चरमावस्था मानी जाती है।
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yoga - फोटो : pixa
योग दिवस मनाए जाने के कारण
  • यहां हम उन कारणों का जिक्र कर सकते हैं, जिसके तहत योग को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में ख्याति दिलाई गई।
  • योग के द्वारा लोगों के बीच वैश्विक समन्वय स्थापित करना।
  • लोगों को योग के फायदों के बारे में जागरूक करना और उनको प्रकृति से जोड़ना।
  • विश्वभर में चुनौतीपूर्ण बीमारियों की दर को घटाना।
  • पूरे विश्व में संवृद्धि, विकास और शांति को फैलाना।
  • लोगों को शारीरिक और मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूक बनाना और योग के माध्यम से इसका समाधान उपलब्ध कराना।

योग का महत्त्व
  • योग न सिर्फ शारीरिक व्यवस्था को सृदढ़ बनाता है, बल्कि व्यक्तित्व की कमियों को दूर कर हमें मानसिक रूप से सबल बनाता है।
  • असीम ऊर्जा और उत्साह का संचार कर योग हमारी व्यवहारकुशलता व कार्यक्षमता को बढ़ाता है। इस प्रकार योग हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण करता है।
  • अगर नियमित योग अभ्यास किया जाए तो सभी स्वास्थ्य चुनौतियाँ इसके माध्यम से पार लगायी जा सकती हैं।
  • योग से मानसिक शांति के साथ शांतिपूर्ण वातावरण का भी निर्माण किया जा सकता है, जो वर्तमान विश्व की माँग भी है। दरअसल आज मानसिक अशांति के चलते व्यक्तिगत व सामूहिक संघर्ष बढ़े हैं।
  • हमारी बदलती जीवन शैली के लिए भी योग करना अनिवार्य हो जाता है।
  • यह हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद कर सकता है।
  • योग से शरीर में लचीलापन और मांसपेशियों में ताकत आती है, साथ ही संतुलित रक्तचाप भी बना रहता है।
  • इसकी महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यूनेस्को द्वारा 2016 में योग को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में अंकित किया जा चुका है।
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yoga - फोटो : pixa
भारत के लिए योग का महत्त्व
भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (एसोचैम) द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक केवल भारत में ही करीब तीन लाख से ज्यादा योग प्रशिक्षकों की आवश्यकता है। वहीं विश्व में करीब 5 लाख योग प्रशिक्षकों की कमी महसूस की जा रही है। अध्ययन के अनुसार योग प्रशिक्षकों की सबसे अधिक मांग दक्षिणपूर्व एशिया में है। भारत के लगभग 3000 योग प्रशिक्षक चीन में कार्य कर रहे हैं, जिसमें अधिकतर योग प्रशिक्षक भारत में योग की राजधानी कहे जाने वाले स्थान हरिद्वार और ऋषिकेश से हैं। इस प्रकार योग के क्षेत्र में अपार रोजगार की संभावनाएँ मौजूद हैं, जिसका लाभ भारत उठा सकता है।

सॉफ्रट पावर के लिहाज से भी भारत के लिए योग का महत्त्व बढ़ जाता है। विदित हो कि सॉफ्रट पावर शब्द का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किया जाता है जिसके माध्यम से कोई देश परोक्ष रूप से सांस्कृतिक अथवा वैचारिक साधनों के माध्यम से किसी अन्य देश के व्यवहार अथवा हितों को प्रभावित करता है। ज्ञातव्य है कि भारत हमेशा से ही सॉफ्रट पावर नीति का समर्थक रहा है। अगर भारत में योग को बढ़ावा दिया जाता है तो भारत योग गुरू की भूमिका निभा सकता है।

इसके अतिरिक्त भारत योग को एक हथियार के रूप में प्रयोग कर विश्व में सांस्कृतिक बढ़त बना सकता है। उदाहरण के तौर पर जैसे चीन में आज 3000 से ज्यादा योग शिक्षक कार्य कर रहे हैं, ठीक ऐसे ही विश्व के अन्य देशों में इसका प्रचार-प्रसार कर अपनी संस्कृति की महानता से विश्व को परिचित करा कर उसे अपने पक्ष में कर सकता है।

भारत योग के माध्यम से मेडिकल टूरिज्म को प्रमोट करने के साथ ही रोग को भी कम कर सकता है। आज भारत में आए दिन नई-नई बीमारियाँ जन्म ले रही हैं, ऐसे में अगर योग को बढ़ावा दिया जाएगा तो स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक सुधार किया जा सकेगा।

इस प्रकार योग अपनाने से लोगों की आय का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य पर खर्च होने से बचेगा जिसका प्रयोग अन्य क्षेत्रें में किया जा सकेगा। साथ ही सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो धन व्यय करती है वह भी बचेगा। अतः योग भारत के लिए अवसरों की खुली खिड़की साबित हो सकती है।
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