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नाबालिग लड़कियों से रेप की वारदातें बढ़ीं, इन राज्यों में दोषी पाए गए तो मिलेगी सजा-ए-मौत

Mon, 29 Jan 2018 02:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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16 दिसंबर 2012 की रात देश के इतिहास में वो काली रात थी, जिसने देश ही नहीं दुनिया को हिला कर रख दिया था। चलती बस में कुछ सिरफिरों ने मेडिकल की छात्रा निर्भया के साथ ऐसी दरिंदगी की थी कि ये घटना आज भी झकझोर कर रख देती है। चिंता की बात है कि इस वारदात के बाद रेप की घटनाएं घटने की बजाए बढ़ ही रही हैं।

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हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और सजा के प्रावधान में बदलाव की कोशिशें लगातार जारी हैं। नाबालिग लड़कियों से रेप के मुद्दे को उठाने के पीछे वजह यह है कि देश 69वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है, फिर भी समाज में उनकी सुरक्षा पर लगातार सवाल खड़े होते रहते हैं।

आईए आपको बताते हैं सजा से जुड़े सख्त प्रावधान...
नाबालिग लड़कियों से रेप की वारदातें इस कदर बढ़ रही हैं, कि राज्य सरकारों को खुद कड़ी सजा का प्रावधान लाना पड़ रहा है। हाल ही में हरियाणा और मध्य प्रदेश सरकार रेप के मामले में फांसी का प्रावधान लेकर आई। इसके मुताबिक 12 साल से कम उम्र की लड़की से रेप करने वाला दोषी पाया जाता है, तो उसे सजा-ए-मौत दी जाएगी।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि वे अदालतों से भी अपील करेंगे कि ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो और एक-डेढ़ साल में ही ऐसे मामलों में न्यायालय फैसला सुनाएं, ताकि ऐसी प्रवृति वाले व्यक्तियों में भय का माहौल बना रहे। 

पहले एफआईआर ही दर्ज नहीं होती थी
सीएम ने कहा कि पिछले तीन सालों में कानून व्यवस्था की स्थिति प्रदेश में पहले की तुलना में बेहतर रही है। पहले एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस थानों में लोग फरियाद लगाते रहते थे और सुनवाई नहीं होती थी, अब हर कोई कहीं से भी एफआईआर दर्ज करवा सकता है। दरअसल, हाल ही में पिंजौर में लड़की के रेप के बाद हंगामा मच गया था और इसी के चलते राज्य सरकार को गंभीर कदम उठाने पड़े थे।

मध्यप्रदेश बना पहला राज्य
इससे पहले मध्यप्रदेश सरकार ने भी 12 साल की कम उम्र की बच्ची से रेप में दोषी पाए जाने वालों को फांसी की सजा दिए जाने का प्रावधान पास किया। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने इस तरह का सख्त कानून बनाया। मध्यप्रदेश में इस तरह के कई मामले सामने आए थे, इसी कड़ी में अब सरकार ने इस संबंध में कानून बनाने का फैसला किया।

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