अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने पोस्ट में लिखा कि ये गांव सीमावर्ती राज्य के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों में हैं। इनमें से 42 गांव चांगलांग जिले में हैं, तो 13 लोंगडिंग में और 11 तिरप जिले में हैं। खांडू ने इस पहल को आखिरी छोर तक विकास करार देते हुए लिखा कि इन गांवों में सड़क, दूरसंचार, बिजली, आजीविका और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
अरुणाचल प्रदेश के म्यांमार की सीमा से सटे 66 गांव अब केंद्र के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) के तहत संवारे जाएंगे। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी साझा की।
विज्ञापन
खांडू ने पोस्ट में लिखा कि ये गांव सीमावर्ती राज्य के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों में हैं। इनमें से 42 गांव चांगलांग जिले में हैं, तो 13 लोंगडिंग में और 11 तिरप जिले में हैं। खांडू ने इस पहल को आखिरी छोर तक विकास करार देते हुए लिखा कि इन गांवों में सड़क, दूरसंचार, बिजली, आजीविका और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
राज्य के अधिकारियों के मुताबिक, वीवीपी का उद्देश्य आजीविका, बुनियादी ढांचे, पर्यटन, कौशल विकास, सड़क, दूरसंचार, आवास और नवीकरणीय ऊर्जा सहित कनेक्टिविटी की कमियों को दूर करना है ताकि यहां के लोगों को सीमावर्ती गांवों में रहने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। केंद्र सरकार ने 15 फरवरी, 2023 को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के पहले चरण में भारत-भूटान और भारत-तिब्बत सीमा पर 455 गांवों को विकसित करने की मंजूरी दी थी। इनमें से 135 गांव अभी भी संपर्क से वंचित हैं।
लोंगडिंग जिले के वक्का गांव की आबादी सबसे अधिक
2011 की जनगणना के मुताबिक, वीवीपी के तहत विकास के लिए चुने गए गांवों में लोंगडिंग जिले के वक्का गांव की जनसंख्या सबसे अधिक है। वक्का में 2,000 से अधिक लोग रहते हैं। इसी जिले के गांव खानु की आबादी 1,629, चांगलांग के गांधीग्राम में 1,754 और सबसे कम आबादी वाले सभी गांव चांगलांग जिले में है। इनमें ओल्ड पोटुक 41 लोगों की आबादी है तो गाहेरीग्राम में 57 और लुंगटुंग में 71 लोग रहते हैं।