नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा कराए गए 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों की गिनती के लिए 66 नोट गिनने वाली अत्याधुनिक मशीनों (सीवीपीएस) का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यह जानकारी दी है।
नोटों की गिनती के लिए इन आधुनिक मशीनों की खरीद के लिए वैश्विक निविदा जारी की गई थी। केंद्रीय बैंक ने सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत इस संबंध में की गई पूछताछ के जवाब में यह जानकारी दी।
आरटीआई आवेदन के जवाब में रिजर्व बैंक ने कहा, ‘इस समय पुराने नोटों की गिनती के लिए 59 आधुनिक गणना मशीनें काम पर लगी हुई हैं। इसके अलावा वाणिज्यिक बैंकों के पास उपलब्ध सात ऐसी मशीनों को भी इस्तेमाल में लाया जा रहा है।’
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केंद्रीय बैंक ने कहा कि सात सीवीपीएस मशीनों को पट्टे पर लेने का काम चल रहा है। इन मशीनों को पट्टे पर लेने के शुल्क के बारे में पूछे गए सवाल पर केंद्रीय बैंक ने कहा कि जो सूचना मांगी गई है वह वाणिज्यिक विश्वास के रूप में है और इसलिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून 2005 की धारा 8(1)डी के तहत इस तरह की जानकारी देने से छूट है।
रिजर्व बैंक ने कहा है कि उसके कार्यालयों में 59 सीवीपीएस मशीनें इस्तेमाल में लाई जा रही हैं और एक निरीक्षक की निगरानी में पांच लोगों का समूह इसका संचालन कर रहा है। ‘इसके अलावा कई अन्य लोग भी इस पूरी प्रक्रिया में शामिल हैं।’
रिजर्व बैंक ने 2016-17 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि पुराने बंद किए गए 500 और 1,000 रुपये के 15.28 लाख करोड़ रुपये यानी 99 प्रतिशत नोट बैंकिंग तंत्र में लौट आए हैं। बैंक ने कहा कि 15.44 लाख करोड़ रुपये के पुराने नोटों में से केवल 16,050 करोड़ रुपये के ऐसे नोट ही बैंकिंग तंत्र में नहीं आए हैं।