असम में सरकार को गुरुवार को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। आठ प्रतिबंधित संगठनों के कुल 644 उग्रवादियों ने 177 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस के मुताबिक, नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ बंगाली (एनएलएफबी), आदिवासी ड्रैगन फाइटर (एडीएफ), नेशनल संथाल लिबरेशन आर्मी (एनएसएलए), यूनाईटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंस (यूएलएफए-आई), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी), कामतापुर लिबरेशन आर्गेनाइजेशन (केएलओ), रवा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (आरएनएलएफ) और कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-माओवादी (सीपीआई-एम) के सदस्य रहे इन उग्रवादियों ने एक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की उपस्थिति में आत्मसमर्पण किया।
सबसे ज्यादा एनएलएफबी के 301 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इसके बाद एडीएफ के 178, एनएसएलए के 87, उल्फा-आई के 50, एनडीएफबी के 8, केएलओ के 6, आरएनएलएफ के 13 और कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के एक उग्रवादी ने सरेंडर किया।
सोनोवाल सरकार ने केंद्र सरकार के अफसरों के साथ इस महीने के शुरुआत में एनडीएफबी के नेताओं के साथ शांति के लिए त्रिपक्षीय समझौता किया था। समझौते के मुताबिक, एनडीएफबी सरगना बी साओराईगवरा समेत सभी उग्रवादी संगठनों के नेता हिंसक गतिविधियां रोकने पर सहमत हुए थे और सरकार के साथ शांति वार्ता में शामिल होने की सहमति जताई थी। इस वार्ता में शामिल होने के लिए साओराईगवरा के साथ एनडीएफबी के कई सक्रिय सदस्य 11 जनवरी को म्यांमार से भारत आए थे।
इसके पहले साल 2019 के आखिरी महीने दिसंबर में 240 से अधिक उग्रवादियों ने समर्पण किया था। आठ दिसंबर से लेकर पिछले तीन सप्ताह के दौरान असम में 240 से अधिक उग्रवादियों ने समर्पण किया है। ये उग्रवादी पिछले एक दशक से दक्षिणी असम, मिजोरम और उत्तरी त्रिपुरा में अपहरण और हत्याओं सहित कई तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे।
इससे पहले इसी साल 16 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में ब्रू रियांग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत मिजोरम और त्रिपुरा में पिछले 23 साल से चली आ रही ब्रू रियांग समस्या का अंत हो गया। अब ब्रू रियांग जनजाति के लगभग 34000 लोगों को त्रिपुरा में ही बसाया जाएगा, इसके लिए त्रिपुरा सरकार जमीन भी दे रही है।