ऑस्ट्रेलियाई दूतावास के अधिकारी होली आदिवासियों के हाथों बने हर्बल गुलाल से खेलेंगे। दिल्ली स्थित ऑस्ट्रेलिया दूतावास ने होली के लिए उदयपुर से 62 किलो खास हर्बल गुलाल मंगवाया है। राजस्थान के आदिवासी अंचल के रूप में पहचाने जाने वाले उदयपुर जिले के आदिवासी दूतावास के इस फैसले से खुशी हैं। उन्हें उम्मीद है कि अन्य लोगों में भी उनके उत्पादों के प्रति लगाव बढ़ेगा।
उदयपुर के उप वन संरक्षण अधिकारी ओपी शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि ग्रामीण आदिवासी महिलाएं हर्बल गुलाल बनाती हैं। वे जंगलों से फूल चुनकर लाती हैं और उसका रंग निकालती हैं। फूल के रंग में अरारोट का इस्तेमाल करके हर्बल गुलाल बनाया जाता है। इसे सुगंधित बनाने के लिए सेंट का भी इस्तेमाल होता है। उन्होंने बताया कि हर्बल गुलाल से त्वचा को नुकसान नहीं होता। इससे आदिवासियों को रोजगार भी मिल रहा है। ऑस्ट्रेलिया के अलावा दिल्ली के प्रमुख लोगों ने करीब पांच से छह क्विंटल गुलाल की खरीद की है। तीन से चार क्विंटल गुलाल जयपुर में भी बिका है।
शर्मा के अनुसार जंगल में रहने वाले आदिवासियों की आमदनी बढ़ाने के लिए वन विभाग ने विशेष प्रयास किए हैं। पहले चरण में 5-6 गांवों में महिलाओं को आर्थिक मदद के साथ प्रशिक्षण दिया गया। उत्पादों की बिक्री भी विभाग ही करवाता है। उन्होंने बताया कि आदिवासियों की आमदनी बढ़ने से वन पर दबाव कम होता है। वे अनाप-शनाप ढंग से जंगल की कटाई नहीं करते हैं। हर्बल गुलाल के अलावा एलोवेरा के उत्पाद और अगरबत्ती बनाने के काम में ग्रामीण महिलाओं को लगाया गया है। इस पहल से जुड़ी महिलाओं की संख्या 300 के करीब हैं।