एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति शृंखला (उत्पादन, प्रोसेसिंग, पाइपलाइन ट्रांसपोर्ट, तरलीकरण, शिपिंग और रीगैसीफिकेशन) से हर साल तकरीबन 350 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित होती हैं। इसमें 70% हिस्सा कार्बन डाइऑक्साइड और 30% मीथेन का होता है
तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) को अक्सर कोयले की तुलना में स्वच्छ ईंधन माना जाता है, लेकिन इसके उत्पादन से लेकर उपयोग तक में ग्रीनहाउस गैसों का बड़ा योगदान होता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की ताजा रिपोर्ट में इस चिंता का खुलासा करते हुए बताया गया है कि मौजूदा तकनीकों का इस्तेमाल करके बगैर अतिरिक्त खर्च करके इस प्रदूषण में 60 फीसदी तक की कटौती की जा सकती है।
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आईईए के अनुसार एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति शृंखला (उत्पादन, प्रोसेसिंग, पाइपलाइन ट्रांसपोर्ट, तरलीकरण, शिपिंग और रीगैसीफिकेशन) से हर साल तकरीबन 350 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित होती हैं। इसमें 70% हिस्सा कार्बन डाइऑक्साइड और 30% मीथेन का होता है। मीथेन विशेष रूप से चिंता का विषय है, क्योंकि यह बिना जले ही वातावरण में पहुंचती है और जलवायु परिवर्तन में कार्बन डाइऑक्साइड से कई गुना ज्यादा असरकारक होती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हर मेगाजूल एलएनजी ऊर्जा पर औसतन 20 ग्राम सीओ2 का उत्सर्जन होता है, जबकि सामान्य प्राकृतिक गैस में यह मात्रा करीब 12 ग्राम होती है। हालांकि, कुल मिलाकर एलएनजी से होने वाला उत्सर्जन, कोयले की तुलना में 25% कम है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, एलएनजी से जुड़ा 99% से अधिक उत्सर्जन कोयले से उत्पन्न प्रदूषण के स्तर से नीचे था।
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ऊर्जा दक्षता से समाधान
रिपोर्ट में सप्लाई चेन को अधिक ऊर्जा-कुशल बनाने और तरलीकरण संयंत्रों में कार्बन डाइऑक्साइड कैप्चर, उपयोग और स्टोरेज (सीसीयूएस) तकनीक को अपनाने के सुझाव दिए हैं। हालांकि शुरुआती उपाय महंगे पड़ सकते हैं, लेकिन यदि एलएनजी टर्मिनलों और उत्पादन इकाइयों को कम उत्सर्जन वाली बिजली से चलाया जाए तो करीब 11 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटाया जा सकता है।
मीथेन रिसाव पर काबू से 9 करोड़ टन कटौती संभव
रिपोर्ट के अनुसार केवल मीथेन रिसाव रोक करीब 9 करोड़ टन सीओ2 के बराबर उत्सर्जन रोक सकते हैं, जो एलएनजी से जुड़े कुल उत्सर्जन का एक चौथाई है। इसी तरह, गैस जलाने की प्रक्रिया को सीमित कर हर साल लगभग 50 लाख टन उत्सर्जन में कटौती की जा सकती है। नीति निर्धारण और उद्योग के लिए संकेत...ऊर्जा संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि आईईए की यह रिपोर्ट स्पष्ट संदेश देती है कि एलएनजी को केवल कोयले से बेहतर बताना काफी नहीं है। इसके संपूर्ण जीवन चक्र के उत्सर्जन में कटौती के लिए वैज्ञानिक और सस्ती तकनीकी अपनानी होगी।