अस्पतालों और ब्लड बैंकों में ब्लड की डिमांड के बावजूद हर साल 60,000 ब्लड यूनिट की एक बड़ी संख्या बर्बाद हो जाती है। ब्लड की हर दिन जबरदस्त डिमांड के बाद भी बर्बाद होने वाले ब्लड यूनिट की संख्या बढ़ती जा रही है।
कर्नाटक राज्य सरकार के एक रिकॉर्ड के मुताबिक सरकारी और निजी ब्लड बैंकों में हर साल 60,000 से अधिक ब्लड यूनिट बर्बाद हो जाती हैं। वहीं कुछ ब्लड यूनिट को ब्लड की खराब गुणवत्ता के लिए छोड़ दिया जाता है। राज्य भर में ब्लड बैकों में बढ़ती ब्लड की डिमांड से हैरान होकर बीजेपी विधायक वी सोमण्णा ने विधायी परिषद में राज्य सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान दिलाया।
सवाल के जवाब में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के आर रमेश कुमार ने स्वीकार किया कि ब्लड दाताओं से इकट्ठा किए गए ब्लड को खारिज कर दिया जाता है, जिससे वह बर्बाद हो जाता है। और यह मामला अब राज्य सरकार के नोटिस पर आ गया है। रमेश कुमार ने आगे कहा कि लगभग सभी ब्लड बैंकों में दान के जरिये इकट्ठा किया गया ब्लड खारिज कर दिया जाता है। क्योंकि वह पुराना होता है। और कुछ अन्य यूनिट को संक्रमित होने के कारण खारिज कर दिया जाता है।
बंगलुरू सिटी में निजी और सरकारी रूप से चलने वाले 64 ब्लड बैंक हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल डोनेट के जरिये लिए गए ब्लड में 1,88,537 ब्लड यूनिट खारिज की गईं हैं। जिसमें 2015-16 में, 64,361 यूनिट ब्लड में 32,644 ब्लड को पुराना होने की वहज से खारिज किया गया था।