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DGP Meet: 5जी नेटवर्क की कमजोरियों को लेकर किया गया आगाह, मनी लॉन्ड्रिंग व टेरर फंडिंग में दुरुपयोग की आशंका

Tue, 24 Jan 2023 05:11 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज में कहा गया है कि 5जी नेटवर्क आसानी से सुलभ और ओपन इंटरनेट प्रोटोकॉल पर बनाया गया है। इसमें पिछली पीढ़ियों (Generations) की सभी कमजोरियां मौजूद हैं, जो इसे साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील बनाते हैं और पूरे सिस्टम की सुरक्षा से समझौता करते हैं।
 
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5जी नेटवर्क - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुई डीजीपी की बैठक में प्रस्तुत किए गए दस्तावेज (नोट) में हाई-स्पीड 5जी टेलीकॉम नेटवर्क की कमजोरियों को लेकर आगाह किया गया है। नोट में उल्लेख किया गया है कि 5जी नेटवर्क मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण जैसे अपराधों को अंजाम देने में बिचौलियों और एजेंटों के लिए मददगार हो सकता है। 

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भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज में कहा गया है कि 5जी नेटवर्क आसानी से सुलभ और ओपन इंटरनेट प्रोटोकॉल पर बनाया गया है। इसमें पिछली पीढ़ियों (Generations) की सभी कमजोरियां मौजूद हैं, जो इसे साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील बनाते हैं और पूरे सिस्टम की सुरक्षा से समझौता करते हैं।

आईपीएस अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि एक आरक्षित 5जी बैंडविड्थ और अत्यधिक सुरक्षित उपकरण को सरकार से संबंधित संवेदनशील संचार और सैन्य उपयोग के लिए सक्रिय रूप से विकसित किया जाना चाहिए। साथ ही कम से कम साइबर जोखिम वाली या उच्च सुरक्षा प्रोटोकॉल वाली स्वीकृत और प्रमाणित कंपनियों को ही सरकारी एजेंसियों के लिए काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए। नोट के मुताबिक, रीयल-टाइम 5जी नेटवर्क का उपयोग करके क्रिप्टोकरेंसी और विकेंद्रीकृत बैंकिंग सिस्टम अधिक लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं, इसलिए इसकी कड़ी (linkages) और वित्तीय प्रभाव का पता लगाना मुश्किल होगा।
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5जी नेटवर्क कोर HTTP और ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (TLS) जैसे आसानी से सुलभ और ओपन इंटरनेट प्रोटोकॉल पर बनाया गया है। नेटवर्क-स्लाइसिंग (Network-Slicing) वातावरण में, अलग-अलग सब-नेटवर्क में साइबर सुरक्षा की अलग-अलग प्रकृति होगी। रेडियो इंटरफेस एन्क्रिप्शन के लिए कुंजियां असुरक्षित रूट पर डिलीवर की जाती हैं। IDOR (Insecure Direct Object Reference) जैसी असुरक्षा उत्पन्न हो सकती है।

टेल्को क्लाउड साइबर हमलों के लिए असुरक्षित
नोट में कहा गया है कि टेल्को क्लाउड (Telco cloud) साइबर हमलों के लिए असुरक्षित है, जो नेटवर्क की सुरक्षा और क्लाउड में मौजूद डेटा से समझौता कर सकता है। नेटवर्क फंक्शन वर्चुअलाइजेशन (एनएफवी) के कारण, अपराधी हमलों को अंजाम दे सकते हैं। यहां तक कि निगरानी के लिए टेलीफोन नंबर (टार्गेट लिस्ट) भी बदल सकते हैं। 5जी में कई सुधार हुए हैं जो ड्रोन, रोबोटिक सर्जरी आदि जैसे रिमोट कंट्रोल कार्यों का समर्थन करते हैं, लेकिन अपराधी इस पहलू का भी फायदा उठा सकते हैं।

इसके अलावा 5जी में एज कंप्यूटिंग का संचालन भी एक मुद्दा है, जिसमें प्रॉसेसिंग यूजर नेटवर्क के करीब विकेंद्रीकृत अंतर-संचार नोड्स पर किया जाता है। यह सुरक्षा प्रतिष्ठानों के लिए डेटा संग्रह की समस्या पैदा करेगा, क्योंकि कोई केंद्रीय नोड नहीं है जिससे डेटा गुजरता है।

साइबर अपराधों में भारी वृद्धि की संभावना
नोट में यह भी कहा गया है कि 5जी लाखों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoTs) और प्रति वर्ग किलोमीटर उपकरणों का समर्थन कर सकता है। इसलिए साइबर अपराधों में भारी वृद्धि होने की संभावना है। साइबर अपराध जैसे मोबाइल नेटवर्क मैपिंग, डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस, ड्रेनिंग बैटरी, सर्विस डिग्रेडेशन, मोबाइल IMSI कैप्चर, मालवेयर इंजेक्शन, CnC क्रिएशन, इंटरसेप्टिंग कम्युनिकेशन, DNS स्पूफिंग, अपलिंक, और डाउनलिंक इंपर्सनेशन को अंजाम देना आसान हो सकता है।

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