तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी सुधर्शन रेड्डी ने गुरुवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के
दौरान नोटिस दिए गए 92 लाख मतदाताओं में से करीब 54 लाख के नाम मतदाता सूची में शामिल कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, 92 लाख में से करीब 54 लाख लोगों को मुख्य मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया है। यह प्रक्रिया पांच नवंबर तक जारी रहेगी।
बाकी 40 लाख मतदाताओं का क्या होगा?
उन्होंने कहा कि बाकी करीब 40 लाख मतदाताओं से दस्तावेज लेने का काम पूरा किया जाएगा। इसके बाद उन्हें भी मुख्य मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। हालांकि, जो लोग दूसरी जगह चले गए हैं या जिनकी मौत हो चुकी है, उनके नाम मुख्य सूची में शामिल नहीं किए जा सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए यह जानकारी दी।
92 लाख मतदाताओं को नोटिस क्यों दिया गया था?
17 अगस्त को चुनाव अधिकारियों ने बताया था कि करीब 92 लाख मतदाताओं को नोटिस दिया जाएगा। इनके चुनावी दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियां थीं। कुछ मतदाताओं की जानकारी 2002 की मतदाता सूची से जुड़ी नहीं थी। इसी वजह से एसआईआर के दौरान उन्हें नोटिस दिया गया।
एसआईआर की प्रक्रिया कब तक चलेगी?
एसआईआर के तहत मतदाता सूची का मसौदा 17 अगस्त को जारी किया गया था। इसके बाद दावे और आपत्तियां लेने तथा उनका निपटारा करने की प्रक्रिया चल रही है। यह प्रक्रिया 17 अगस्त से 5 नवंबर तक चलेगी।
फॉर्म-7 और फॉर्म-6 के कितने आवेदन मिले?
सीईओ ने यह भी बताया कि एसआईआर के दौरान फॉर्म-7 के करीब 29 हजार आवेदन मिले हैं। वहीं, फॉर्म-6 के 4.43 लाख आवेदन मिले हैं। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 किसी व्यक्ति को खुद जमा करना होता है। उन्होंने कहा, अगर यह आवेदन किसी राजनीतिक दल की तरफ से बड़ी संख्या में आता है, तो इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए। इसका सही तरीके से सत्यापन होना चाहिए। इसके बाद उचित आदेश जारी किया जाना चाहिए।
क्या मतदाताओं को दफ्तर बुलाया जाएगा?
फॉर्म-7 उस आवेदन को कहा जाता है, जिसमें मौजूदा मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने या हटाने पर आपत्ति दर्ज की जाती है। रेड्डी ने बताया कि जिन मतदाताओं के लिए नोटिस जारी हुआ है, उनके मामले में संबंधित बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) को उनके घर जाना होगा। बीएलओ जरूरी दस्तावेज लेगा।
इसके बाद इन दस्तावेजों को ईसीआई नेट पर अपलोड किया जाएगा। फिर चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) या सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) इस पर फैसला करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे मतदाताओं को सुनवाई के लिए ईआरओ या एईआरओ के कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं है।
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किन मामलों में होगी सुनवाई?
उन्होंने कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही सुनवाई होगी। इसका फैसला ईआरओ या एईआरओ करेंगे। कोशिश होगी कि सुनवाई ऑनलाइन हो। इसके लिए उपलब्ध और सुविधाजनक संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ऐसी सुनवाई के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर को अपडेट कर दिया गया है। इसे काम करने के लिए तैयार भी कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है।