महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में 50% आरक्षण की सीमा को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बरकरार रखने पर, एडवोकेट देवदत्त पालोडकर ने कहा, 'महाराष्ट्र राज्य में निकाय चुनावों के बारे में अहम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट बेंच के सामने हुई... अब इस मामले पर शुक्रवार (12 दिसंबर) को दोपहर 12 बजे सुनवाई होगी। पढ़ें क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र में जिन 57 स्थानीय निकायों में आरक्षण की 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन हुआ, उनके चुनाव के अंतिम परिणाम इस मामले में उसके फैसले पर निर्भर करेंगे। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस टिप्पणी स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण के मुद्दे पर सुनवाई 28 नवंबर को तय कर दी।
सॉलिसिटर जनरल ने सलाह लेने के लिए मांगा समय
महाराष्ट्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोटा पर 50 फीसदी की सीमा का पालन करने के बारे में राज्य निर्वाचन आयोग से सलाह लेने के लिए समय मांगा। इससे पहले 19 नवंबर को, पीठ ने राज्य सरकार से स्थानीय निकाय चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया को तब तक टालने पर विचार करने को कहा था, जब तक कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 फीसदी आरक्षण देने के मुद्दे पर फैसला नहीं कर लेती।
'57 निकायों में 50 फीसदी आरक्षण की सीमा का उल्लंघन'
एसईसी की ओर से मंगलवार को सीनियर एडवोकेट बलबीर सिंह ने पीठ को बताया कि 242 नगर निगम और 42 नगर पंचायत, यानी कुल 288 निकाय के चुनाव 2 दिसंबर के लिए पहले ही अधिसूचित कर दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इनमें से 57 निकायों में 50 फीसदी आरक्षण की सीमा का उल्लंघन हुआ है। इस पर पीठ ने कहा कि पहले से अधिसूचित 57 निकायों में 50 फीसदी से अधिक आरक्षण चल रही कार्रवाई के आखिरी नतीजे पर निर्भर करेगा।