सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि न्यायिक अधिकारी पद के लिए सुनाई और देखने में अयोग्यता की वैध सीमा 50 प्रतिशत है। इसके साथ ही जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने वकील वी सुरेंद्र मोहन की याचिका को खारिज कर दिया, जिन्होंने 70 फीसदी की अयोग्यता के साथ आंशिक रूप से अंधे वर्ग में सिविल जज (जूनियर डिविजन) के लिए आवेदन किया था।
पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारी के पास मामलों को सुनने और फैसला लिखने के लिए सुनने, देखने और बोलने की क्षमता की उचित सीमा होनी चाहिए। लिहाजा सुनने और देखने में अक्षमता की 50 फीसदी सीमा उचित और तार्किक है। मद्रास हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज करने में कोई त्रुटि नहीं की।