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CRPF-BSF: 45 कैडर अफसर अस्थायी तौर पर बनेंगे डीआईजी, डीओपीटी की मंजूरी, 'आईपीएस' कोटा मामले का होगा स्थायी हल

सार

सीएपीएफ में अभी तक 2009 बैच के असिस्टेंट कमांडेंट को पहला प्रमोशन नहीं मिला है। डिप्टी कमांडेंट बनने के लिए उन्हें 13 से 16 साल का समय लग रहा है। 2004 बैच के डिप्टी कमांडेंट को 17 वर्षों के बाद भी 'सेकेंड इन कमांड' का पद नहीं मिल सका। कमांडेंट की बात करें तो 1999 बैच के कैडर अधिकारी 22 वर्षों के बाद कमांडेंट बनने का इंतजार कर रहे हैं...
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सीएपीएफ - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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केंद्रीय अर्धसैनिक बल, सीआरपीएफ व बीएसएफ के 45 कैडर अफसरों को 2022 में अस्थायी तौर से डीआईजी बनने का अवसर मिलेगा। डीओपीटी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है, जिसके तहत बीएसएफ में 15 और सीआरपीएफ में डीआईजी के 30 पदों को कैडर अधिकारियों के जरिए भरने की इजाजत मांगी गई थी। ये सभी पद आईपीएस अफसरों के लिए आरक्षित हैं। जब कोई आईपीएस, इन पदों पर ज्वाइन नहीं करता है, तो उन्हें अस्थायी तौर से कैडर अधिकारियों की ओर डायवर्ट कर दिया जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने आदेशों में कहा है कि आईपीएस के ज्वाइन न करने के चलते जो पद खाली रह जाते हैं और उन्हें कैडर अधिकारियों से भरना पड़ता है, 2023 में यह स्थिति खत्म होनी चाहिए। साथ ही साल 2021 में तय इन बलों की कैडर समीक्षा जल्द से जल्द पूरी करें। सीएपीएफ में आईपीएस कोटा खाली रहना, इस मामले का स्थायी हल तलाशा जाए।

2023 में आईपीएस कोटे के डायवर्जन की नौबत न आए

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 29 जून को जारी अपने आदेश में कहा है कि डीओपीटी ने इन पदों को कैडर अफसरों के माध्यम से भरने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। साथ ही, डीओपीटी ने यह व्यवस्था भी की है कि जैसे ही कोई आईपीएस अधिकारी, सीआरपीएफ या बीएसएफ में डीआईजी के पद पर आने के लिए तैयार होता है तो उस पद को तुरंत प्रभाव से आईपीएस कोटे में डायवर्ट कर दिया जाए। हालांकि आईपीएस के ज्वाइन न करने की स्थिति में डीआईजी के पदों को बांटने से ज्यादा अफसर उपलब्ध रहते हैं। इसका स्थाई समाधान होना चाहिए। साल 2023 से ऐसी व्यवस्था लागू हो कि जिसमें डीआईजी के पदों का एक कोटे से दूसरे कोटे में डायवर्जन करने जैसी स्थिति न आए। सीआरपीएफ और बीएसएफ के कैडर रिव्यू को अतिशीघ्र पूरा करें। यह ध्यान रखें कि कैडर रिव्यू में ही आईपीएस कोटे की समस्या खत्म हो।

केंद्र में खाली रहते हैं आईपीएस डीआईजी के अधिकांश पद

केंद्रीय जांच एजेंसियों एवं दूसरे कई संगठनों में आईपीएस डीआईजी के लिए आरक्षित पदों में से अधिकांश पोस्ट खाली पड़ी रहती हैं। इसके चलते सीआरपीएफ एवं बीएसएफ जैसे केंद्रीय बलों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां पर आईपीएस डीआईजी ज्वाइन नहीं कर रहे, तो दूसरी ओर कैडर अधिकारियों को स्थायी पदोन्नति देकर डीआईजी नहीं बनाया जा रहा। उन्हें अस्थायी तौर पर छह माह या एक साल के लिए पदोन्नति दी जाती है। इस बीच आईपीएस डीआईजी ने ज्वाइन कर लिया तो कैडर अफसरों को फिर से पुरानी रैंक पर आना पड़ता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की 29 अप्रैल 2022 की सूची के मुताबिक, सीआरपीएफ में आईपीएस डीआईजी के 39 पद स्वीकृत हैं, लेकिन उस समय में केवल एक ही आईपीएस डीआईजी ने ज्वाइन किया था। आईपीएस डीआईजी के 30 पद कैडर अफसरों को डायवर्ट करने पड़े। इसके बाद भी आईपीएस डीआईजी के सात पद रिक्त रह गए।

आईपीएस डीआईजी को केंद्रीय सुरक्षा बल नहीं आ रहे पसंद

बीएसएफ में भी सीआरपीएफ जैसा ही हाल रहा है। यहां पर आईपीएस डीआईजी के 26 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 15 पद कैडर अधिकारियों को डायवर्ट कर दिए गए। इसके बाद भी आठ पद खाली पड़े हैं। इससे आईपीएस कोटे की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। अप्रैल की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की पहली पंक्ति वाली बॉर्डर गार्ड फोर्स में तीन ही आईपीएस डीआईजी कार्यरत थे। बीएसएफ के पूर्व एडीजी संजीव कृष्ण सूद कहते हैं, आईपीएस को सीएपीएफ की ज्वाइनिंग से भागना नहीं चाहिए। ये तो जरूरी नहीं है कि ड्यूटी हर समय सुविधाजनक हो। बीएसएफ तो देश का प्रमुख प्रहरी बल है। कैडर अधिकारी भी तो वर्षों तक बॉर्डर पर ड्यूटी देते हैं। तपते रेगिस्तान में बॉर्डर गार्ड का जिम्मा संभालते हैं। यहीं से रिटायर हो जाते हैं। आईपीएस द्वारा केवल इसलिए ज्वाइन नहीं करना कि उसे यहां पर हार्ड पोस्टिंग मिलेगी, ये तो गलत है। अगर वे नहीं आना चाहते तो उनके लिए आरक्षित पदों पर कैडर अधिकारियों को स्थायी तौर से पदोन्नति दे दी जाए।

दूसरे केंद्रीय बल भी आईपीएस डीआईजी की पसंद नहीं बन रहे

गत अप्रैल में सीआईएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 20 पद स्वीकृत थे। उनमें से 15 पद खाली रहे हैं। एसएसबी में 25 पद आईपीएस डीआईजी के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें से 13 पद कैडर अधिकारियों को अस्थायी तौर से दे दिए गए। इसके बाद भी 10 पद रिक्त रह गए। उस वक्त केवल दो पदों पर आईपीएस डीआईजी कार्यरत रहे हैं। आईबी में आईपीएस डीआईजी के 63 पद थे, जिनमें से 34 पद खाली रहे हैं। आईटीबीपी में आईपीएस डीआईजी के लिए 10 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से छह पद खाली थे। एनसीआरबी में आईपीएस डीआईजी के तीन पद हैं, तीनों ही खाली पड़े थे। एनईपीए में एक पद रिजर्व है, वह भी खाली रहा। एनएसजी में दो पद हैं, एक रिक्त है। कुछ माह पहले 17 सेवानिवृत्त आईपीएस ने सेवारत आईपीएस से केंद्र सरकार के तहत सेवा देने के लिए आगे आने की अपील की थी। पूर्व अफसरों ने कहा था, आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आना चाहिए। उन्हें यहां पर विभिन्न जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों में काम करने का मौका मिलता है। वे समय रहते इन अवसरों का लाभ उठाएं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, केंद्र और राज्य सरकार के बीच संबंधों को मजबूत करती है। अखिल भारतीय सेवाएं ही सबसे महत्वपूर्ण सूत्र हैं जो भारतीय संघ और राज्यों को एक साथ जोड़ते हैं।

कैडर अफसरों को समय पर नहीं मिल रही पदोन्नति

सीएपीएफ में अभी तक 2009 बैच के असिस्टेंट कमांडेंट को पहला प्रमोशन नहीं मिला है। डिप्टी कमांडेंट बनने के लिए उन्हें 13 से 16 साल का समय लग रहा है। 2004 बैच के डिप्टी कमांडेंट को 17 वर्षों के बाद भी 'सेकेंड इन कमांड' का पद नहीं मिल सका। कमांडेंट की बात करें तो 1999 बैच के कैडर अधिकारी 22 वर्षों के बाद कमांडेंट बनने का इंतजार कर रहे हैं। कैडर अधिकारियों के मुताबिक, अगर इस कैडर रिव्यू में कुछ नहीं हुआ तो 3-4 साल बाद कमांडेंट बनने में 25 से 30 साल लगेंगे। नक्सल और आतंकवाद वाले कई इलाके तो ऐसे हैं जहां ग्राउंड कमांडरों को ठीक से मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल पाती। सीएपीएफ से रिटायर्ड अधिकारी वीपीएस पंवार और एसएस संधू बताते हैं कि अगर कैडर अफसर अपने हकों की बात मीडिया में करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो जाती है। सीएपीएफ के दस हजार अफसर अपनी पदोन्नति को लेकर चिंतित हैं। बीस साल की सेवा के बाद आईपीएस अधिकारी आईजी बन जाता है, लेकिन इस अवधि में कैडर अफसर मुश्किल से कमांडेंट के पद तक पहुंच पाता है। उसे आईजी बनने में 33-35 साल लग जाते हैं। खास बात, यहां तक भी सभी कैडर अधिकारी नहीं पहुंच पाते।

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