द लैंसेट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2023 में 43.6 प्रतिशत डायबिटीज मरीजों की पहचान हुई। यह आंकड़ा वर्ष 2000 की तुलना में 14 प्रतिशत ज्यादा है। अच्छी बात यह है कि जिन मरीजों की पहचान हुई, उनमें से 97 प्रतिशत को इलाज मिल रहा है।
दुनियाभर में डायबिटीज एक बड़ी समस्या है। अब भी करीब 44 फीसदी लोगों को अपनी इस बीमारी का पता ही नहीं चल पाता। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में यह बड़ी चुनौती है।
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द लैंसेट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2023 में 43.6 प्रतिशत डायबिटीज मरीजों की पहचान हुई। यह आंकड़ा वर्ष 2000 की तुलना में 14 प्रतिशत ज्यादा है। अच्छी बात यह है कि जिन मरीजों की पहचान हुई, उनमें से 97 प्रतिशत को इलाज मिल रहा है। रिपोर्ट ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) स्टडी की है, जिसमें वर्ष 2000 से 2023 के बीच 204 देशों के आंकड़े शामिल किए गए। इसमें बताया गया कि 15 साल से ऊपर की उम्र के 55 फीसदी लोगों में डायबिटीज की पहचान हुई। लेकिन अब भी आधे से ज्यादा लोग अनजान हैं। अमेरिका और कनाडा में डायबिटीज की पहचान दर सबसे ज्यादा रही, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया में इलाज बेहतर मिल रहा है। चिली और अर्जेंटीना में इलाज के दौरान डायबिटीज को नियंत्रित करने वाले मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है।
युवाओं के लिए स्क्रीनिंग प्रोग्राम की जरूरत...
शोधकर्ताओं ने युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग प्रोग्राम की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि दवाइयों और डायबिटीज मॉनिटरिंग टूल्स की पहुंच अब पहले से बेहतर हुई है, लेकिन और काम करने की जरूरत है।
2050 तक 1.3 अरब डायबिटीज के मरीज
मध्य अफ्रीकी देशों में हालात सबसे खराब हैं, जहां सिर्फ 20 प्रतिशत लोगों को ही पता है कि उन्हें डायबिटीज है। मुख्य शोधकर्ता लॉरिन स्टैफर्ड ने कहा, 2050 तक दुनिया में 1.3 अरब लोग डायबिटीज से जूझ सकते हैं। अगर आधे लोगों को पता ही नहीं होगा, तो यह एक साइलेंट एपिडेमिक बन जाएगी।