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महाराष्ट्र: 18 दिन के भूख हड़ताल के बाद 400 किमी का सफर, जरांगे की बिगड़ी तबीयत; रद्द हो सकता है मुंबई मार्च

Wed, 16 Sep 2026 03:10 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने बुधवार को कहा कि लंबे समय तक यात्रा करने और लगातार जारी भूख हड़ताल के कारण उनकी तबीयत बिगड़ रही है। ऐसे में उनका मुंबई दौरा रद्द भी करना पड़ सकता है।
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मनोज जरांगे, आरक्षण कार्यकर्ता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मराठा आरक्षण की मांग को लेकर 18 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे मनोज जरांगे ने लगातार यात्रा के कारण तबीयत बिगड़ने की बात कही है। पेट और पैरों में जलन की शिकायत के बीच उन्होंने कहा कि मुंबई का दौरा रद्द भी हो सकता है। मुंबई पुलिस ने उन्हें आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है, इसके बावजूद वह समर्थकों के साथ मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं। उनकी योजना 19 सितंबर को मुंबई पहुंचने की है।

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14 घंटे की यात्रा के बाद पटोदा पहुंचे जरांगे
जरांगे बुधवार सुबह करीब 11 बजे महाराष्ट्र के बीड़ जिले के पटोदा पहुंचे। वह जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मंगलवार रात रवाना हुए थे और करीब 14 घंटे की यात्रा के बाद यहां पहुंचे। अंतरवाली सराटी में उन्होंने अपने आंदोलन के नए चरण की शुरुआत की है। पटोदा पहुंचने के बाद उन्होंने वहां मौजूद लोगों को संबोधित भी किया।

पेट और पैरों में तेज जलन की शिकायत
जरांगे ने बताया कि उन्हें पेट और पैरों में तेज जलन महसूस हो रही है। उन्होंने कहा, 'अगर मैं इलाज करवाता हूं तो सरकार पूरी तरह निश्चिंत हो जाती है। अगर इलाज बंद कर देता हूं तो सरकार चिंतित हो जाती है। मुंबई का यह दौरा मेरी सेहत पर भारी पड़ रहा है। अगर मैं ठीक रहा तो यात्रा जारी रख सकता हूं, लेकिन भूख हड़ताल के दौरान इतनी लंबी यात्रा करना ठीक नहीं है। अगर कोई विकल्प नहीं बचा तो दौरा रद्द भी किया जा सकता है।
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आरक्षण को बताया दौरे से ज्यादा जरूरी
जरांगे पिछले 18 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। वह मराठा समुदाय के उन लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं, जिनके कुनबी जाति से जुड़े वंशावली रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। पटोदा में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'आरक्षण दौरे से ज्यादा महत्वपूर्ण है। पेट और पैरों में हो रही जलन के कारण मुंबई का दौरा मुश्किल नजर आ रहा है।'

मुंबई जाने की नहीं मिली अनुमति
मुंबई पुलिस ने इससे पहले जरांगे को अपना प्रदर्शन आजाद मैदान तक ले जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस ने मौजूदा गणेश उत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था। जरांगे इसके बावजूद मंगलवार को कारों के काफिले के साथ महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के लिए रवाना हो गए। रास्ते में सैकड़ों ग्रामीण उनके काफिले के साथ जुड़ते गए और उन्होंने आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया।

समर्थकों से अकेले जाने देने की अपील
जरांगे ने अपने समर्थकों से उन्हें अकेले मुंबई जाने देने की अपील की। उन्होंने कहा,'पटोदा से मेरे पीछे कोई वाहन नहीं आना चाहिए। कृपया मुझे अकेले जाने दें। अगर वे मेरे पीछे आते रहे तो मैं अपना रास्ता बदलकर मुंबई जाऊंगा। मैं सिर्फ पुलिस को इसकी जानकारी दूंगा। अगर मुझे मुंबई में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई तो आप सभी आ सकते हैं।' 

फडणवीस ने कानून-व्यवस्था को लेकर दिया बयान
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को संकेत दिया था कि सरकार डराने-धमकाने वाली रणनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने गणेश उत्सव के दौरान आंदोलन के समय को लेकर भी सवाल उठाया था। फडणवीस ने कहा कि सरकार ने मराठा प्रदर्शनकारियों की ओर से रखी गई 13 में से 12 'कानूनी रूप से वैध' मांगें स्वीकार कर ली हैं।

19 सितंबर को मुंबई पहुंचने की योजना
जरांगे की मौजूदा योजना के मुताबिक उनका काफिला बीड़, अहिल्यानगर जिले के श्रीगोंदा, पुणे के हडपसर और रायगढ़ जिले के खोपोली से होते हुए 19 सितंबर को मुंबई के आजाद मैदान पहुंचेगा। इस दौरान उन्हें 400 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करनी होगी।

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2025 में भी आजाद मैदान में किया था आंदोलन
जरांगे ने इससे पहले 29 अगस्त 2025 को आजाद मैदान में पांच दिन तक बड़ा प्रदर्शन और भूख हड़ताल की थी। उनकी मांग पात्र मराठों को कुनबी (ओबीसी) जाति प्रमाण पत्र जारी करने की थी। 2 सितंबर 2025 को राज्य सरकार द्वारा उनकी आठ में से छह मांगें स्वीकार किए जाने और कुनबी वर्गीकरण प्रमाण पत्र जारी करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद यह आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।

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