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कोरोना पर अंकुश लगाने को सार्वजनिक इमारतों में 40 फीसदी तक नमी जरूरी

Sat, 22 Aug 2020 05:38 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
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कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने के साथ साथ भारत और जर्मनी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने सार्वजनिक इमारतों में 40 फीसदी तक नमी बरकरार रखने की भी सलाह दी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि नमी के चलते वायरस के फैलने का खतरा कम हो जाता है।

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सीएसआईआर की नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी के वैज्ञानिकों वाली इस टीम ने कहा कि महामारी पर काबू पाने के लिए जरूरी है कि जिन जगहों पर अधिक लोग मौजूद रहते हों जैसे अस्पताल, दफ्तर, सार्वजनिक परिवहन आदि में नमी का स्तर कायम रखा जाए। द एरोसोल एवं वायु गुणवत्ता जर्नल में छपे शोध में वैज्ञानिकों ने मूल रूप से साक्षेप आर्द्रता पर जोर दिया है।

इसके मुताबिक 40 से 60 फीसदी तक की सापेक्ष आर्द्रता वायरस को फैलने और मानव के श्वास तंत्र से शरीर के भीतर जाने से रोकती है। जर्मनी के लेबनीज इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रोपोस्फेरिक रिसर्च के शोध में सह लेखक अजीत अहलावत ने बताया कि आर्द्रता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब हम बोलते हैं तो पांच माइक्रोमीटर व्यास जितने छोटे कण हवा में नौ मिनट तक तैरते हैं।
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जितनी अधिक नमी हवा में होगी कण उतनी ही तेजी से बड़े होंगे। इस लिए अगर आर्द्रता 40 फीसदी से कम होगी तो वायरस के कण कम नमी ग्रहण करेंगे और हल्के रहेंगे व देर तक हवा में तैरते रहेंगे और लोगों के शरीर में इनके प्रवेश करने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके अलावा शुष्क हवा नासिका की पतली छिल्ली को और सुखा देती है जिससे वायरस के शरीर में प्रवेश करने की संभावना बढ़ जाती है।
 
सर्दियों में विशेष ध्यान देने की जरूरत
वैज्ञानिकों ने कहा, इस शोध में किए गए दावे को लेकर सर्दियों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि इस दौरान लोग हीटर वाले कमरों में ज्यादातर समय बिताएंगे। ऐसे में कमरे में नमी का स्तर बरकरार रखना बहुत जरूरी होगा ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके।

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