फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत में 40% महिलाएं HIV से ग्रसित, 2 लाख होते हैं टीबी पीड़ित

Sun, 05 Feb 2017 03:09 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
देश में हर साल 40 फिसदी महिलाएं एचआईवी से ग्रसित होती है। यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) ने अपने आंकड़ों में कहा है कि देश के लोगों के स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए सरकारें सही दिशा में काम कर रही हैं। 
विज्ञापन


कई गंभीर बीमारियों पर लगी रोकथाम

यूएनडीपी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में विश्व में कई गंभीर बीमारियों के स्तर में काफी कमी आई है। जिन बीमारियों पर रोकथाम लगी है उनमें एचआईवी एड्स, मलेरिया और टीबी शामिल है। हेल्थकेयर में टेक्नोलॉजी के प्रयोग से और नई वैक्सीन के ईजाद होने से इसमें कमी आई है। लेकिन इसके बावजूद अभी भी सस्ती दर पर सभी को इलाज पहुंचे यह एक चेलेंज बना हुआ है। 

नहीं कम हुई है आत्महत्या करने वालों की संख्या

रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर में इतने सुधारों के बावजूद अभी भी आत्महत्या करने वालों की संख्या में कमी नहीं आई है। विश्व में अभी भी कई लोग आत्महत्या कर रहे हैं और इसमें 19 से 25 वर्ष के युवा सबसे ज्यादा शामिल हैं। इसके अलावा दूषित पर्यावरण से मरने वालों की संख्या तीसरे नंबर पर है। 
विज्ञापन


भारत में हर साल टीबी से मरते हैं लाखों लोग

भारत में हर साल टीबी से लाखों लोग मरते हैं। आंकड़ों के हिसाब से देश की एक चौथाई आबादी इस बीमारी से ग्रसित है। टीबी हर साल 220000 लोगों को अपना शिकार बनाती है। इसके अलावा 2015 में 21 लाख लोग एचआईवी से शिकार हैं जिनमें 40 फीसदी महिलाएं हैं। 

मातृ दर संख्या में आई है कमी

महिलाओं की मातृ दर संख्या को कम करने के लिए काफी काम सरकारों ने किया है। पहले जहां यह प्रति लाख पर 212 थी, वहीं अब यह 167 हो चुकी है। हालांकि इस पर और काम अभी किया जाना बाकी है। इसका कारण यह है कि अब 80 फीसदी डिलेवरी अस्पताल में नर्स और डॉक्टर के सामने होती हैं न कि घर पर किसी दाई के द्वारा। 

4.5 करोड़ बच्चे अभी भी हैं कुपोषण के शिकार

देश में पांच साल से नीचे 4.5 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार हैं और 1.7 करोड़ बच्चे अविकसित पैदा होते हैं। हालांकि पैदा होने वाले बच्चों की मृत्यु दर में काफी कमी आ गई है। 1990 में जहां प्रति हजार बच्चों पर यह दर 125 थी, वहीं 2013 में यह 49 पर आ गई है। 
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें