ये महज इत्तेफाक नहीं है कि गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मोदी सरकार 2.0 का एजेंडा देश के सामने रखा। राष्ट्रपति ये भी बताते हैं कि मोदी सरकार किस तरह नए भारत की नीव रखेगी। उनके संबोधन को अभी छह घंटे भी नहीं हुए थे कि शाम को तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के चार सांसदों की खबर आ गई। वे चारों अब भाजपा में शामिल हो गए हैं। ये सब यूं ही नहीं हुआ। अगर आप कई बातों को एक-दूसरे से जोड़ कर देखें तो इस नतीजे पर पहुंचेंगे कि मोदी 2.0 का ये ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है। यानी एजेंडे पर काम शुरू हो गया है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में कई दूसरी पार्टियों में भी ये सुनने को मिले कि उनके फलां नेता भाजपा में चले गए हैं।
इस बार भाजपा का एजेंडा छिपा हुआ नहीं है। राष्ट्रपति के भाषण को देखें तो उसमें ऐसा कुछ भी नया नहीं था जो मोदी ने सार्वजनिक तौर पर पहले न कहा हो। 'एक राष्ट्र एक चुनाव' पर पिछले साल ही भाजपा आगे कदम रख चुकी थी। तभी विधि आयोग की रिपोर्ट भी आ गई। सुझाव भी दे दिए गए। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत मिल गया। बता दें कि पीएम मोदी और भाजपा इस कार्यकाल में किसी भी तरह 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की योजना को अमलीजामा पहनाने का प्रयास करेंगे।
अगर भाजपा में यह एजेंडा हल्का होता तो संसद का सत्र शुरू होने के तुरंत बाद मोदी एक राष्ट्र एक चुनाव के मसले पर विपक्षी दलों के अध्यक्षों की बैठक न बुलाते। मोदी ने ऐसा कर अपनी मंशा जता दी है। उनका स्पष्ट संदेश है कि विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर सरकार के साथ आएं तो ठीक है, अन्यथा सदन में बहुमत का जुगाड़ करना भी भाजपा को आता है।
वित्त मंत्रालय की जांच एजेंसियों में बैठे एक अधिकारी की मानें तो अब एक नहीं, बल्कि कई पार्टियों के नेताओं के यहां नोटिस भेजने का सिलसिला शुरु होगा। फाइल वर्क शुरू हो चुका है। किसी के खिलाफ नए मामले दिखेंगे तो कोई पुराने केसों में फंसा मिलेगा। खासतौर पर, कांग्रेस, टीडीपी, सपा, बसपा, टीएमसी और आरजेडी के कई नेताओं को ऐसी परेशान झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।