आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) और यूरोपीय संघ बौद्धिक संपदा कार्यालय (ईयूआईपीओ) द्वारा अप्रैल 2016 में प्रकाशित रिपोर्ट ‘नकली और पाइरेटेड वस्तुओं का व्यापार: आर्थिक असर के आकलन’ में यह अनुमान लगाया गया कि साल 2013 में दुनिया भर में नकली माल और पाइरेसी की कुल आर्थिक और सामाजिक कीमत 737 से 898 अरब डॉलर तक थी।
इसके साल 2022 तक बढ़कर 1.54 से 1.87 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है जो करीब 108 फीसदी की बढ़त को दर्शाता है। इसके अलावा, नकल और पाइरेसी की वजह से साल 2013 में दुनिया में कुल 20 से 26 लाख तक नौकरियां खत्म हो गईं थीं और इसके साल 2022 तक बढ़कर 42 से 54 लाख तक पहुंच जाने की आशंका है जो कि करीब 110 फीसदी की बढ़त को दर्शाता है।
फिक्की के महासचिव डॉ. संजय बारू ने कहा कि तस्करी, नकली माल उत्पादन और पाइरेसी वाली वस्तुओं के अवैध व्यापार ने अर्थव्यवस्था को कई तरीके से प्रभावित किया है। इसने वैध उद्योग को अस्थिर किया है। इनोवेशन एवं निवेश पर अंकुश लगाया है। सरकारी राजस्व को घटाया है और उपभोक्ताओं की सेहत एवं सुरक्षा को भी नुकसान पहुंचाया है।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर देखें तो यह पारदेशीय अपराध, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को हवा दे रहा है। यह अन्य आपराधिक गतिविधियों के साथ मिश्रित हो जाता है, इसलिए यह कानून के शासन और वैध बाजार अर्थव्यवस्था को भी खोखला कर रहा है, जिससे दुनिया भर में ज्यादा असुरक्षा और अस्थिरता पैदा हो रही है।
अर्थव्यवस्था को नष्ट कर रही तस्करी और नकली माल उत्पादन जैसी गतिविधियां
फिक्की की पहल अर्थव्यवस्था को नष्ट कर रही तस्करी और नकली माल उत्पादन जैसी गतिविधियों के खिलाफ कमेटी (फिक्की कास्केड) द्वारा अवैध व्यापार: आतंकवाद और संगठित अपराध के वित्त पोषण को बढ़ावा (इलिसिट ट्रेड : फ्यूलिंग टेरर फाइनेंसिंग ऐंड आर्गनाइज्ड क्राइम) शीर्षक की एक फिक्की-केपीएमजी रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट को फिक्की के सम्मेलन में जारी किया गया। इस रिपोर्ट से आतंकवाद को वित्त पोषण, संगठित अपराध और अवैध व्यापार के बीच के गठजोड़ को समझने में मदद मिलती है।
भारत में तस्करी कई तरीके की होती है। किसी सामान के बारे में घोषित न करना, उसकी कीमत कम बताना, अंतिम उपयोग का गलत इस्तेमाल या अन्य तरीके से। साल 2016 में घोषित न होने वाले करीब 1,187 करोड़ रुपये के सामान और कीमत कम बताए जा रहे 254 करोड़ रुपये के सामान जब्त किए गए। अंतिम इस्तेमाल के दुरुपयोग होने वाले करीब 2,780 करोड़ रुपये के सामान जब्त किए गए। यह साल 2015 में 953 करोड़ रुपए ही था।
इस प्रकार इसमें 190 फीसदी की बढ़त देखी गई। सबसे ज्यादा नकली माल उत्पादन और तस्करी होने वाली वस्तुओं में तंबाकू, सिगरेट, इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुएं, सोना, मशीनरी एवं पार्ट्स, अल्कोहल वाले पेय, आटो उपकरण, उपभोक्ता वस्तुएं (एफएमसीजी) और मोबाइल फोन आदि शामिल हैं।