बुनियादी ढांचा विकास पर रिपोर्ट
- फोटो : ANI
भारत के कई शहरों में मास्टर प्लान के अभाव का आरोप लगता है। हालांकि, ताजा मामला अधिक गंभीर है, क्योंकि देश की 39 फीसदी राजधानियों में कोई सक्रिय मास्टर प्लान नहीं होने की बात सामने आई है। बेंगलुरु के एक थिंक टैंक जनाग्रह की सर्वेक्षण रिपोर्ट में ये बात सामने आई है। खास बात ये कि केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने खुद ये रिपोर्ट जारी की है।
महापौर और पार्षदों की सीमित भूमिका
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कम से कम 39 प्रतिशत राजधानी शहरों के पास कोई सक्रिय मास्टर प्लान नहीं है। भारत के शहर-प्रणाली 2023 के वार्षिक सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि महापौरों और पार्षदों की केवल प्रमुख नगरपालिका कार्यों में ही, लेकिन सीमित भूमिका होती है।
मेयर का कार्यकाल पांच साल से कम
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया है कि 17 प्रतिशत शहरों में मेयर का कार्यकाल पांच साल से कम है, उन्होंने कहा कि मेयर का पद मोटे तौर पर "औपचारिक और महत्वहीन" है। कई शहरों में मेयर को पांच साल से कम का कार्यकाल मिलता है।
संवैधानिक संशोधन के कारण बदली स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महापौर और पार्षद प्रतिनिधियों का कार्यकाल छोटा होता है। 74वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के कारण आरक्षित सीटें आवंटित की जाती हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, संशोधन का परिणाम यह हुआ है कि हमारी शहर सरकारें व्यावहारिक रूप से नागरिक सेवा वितरण एजेंसी बनकर रह गई हैं।
39 प्रतिशत राजधानी शहरों में सक्रिय स्थानिक योजनाएं नहीं
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, शहरी निवासियों के लिए बुनियादी ढांचे और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने और शहरी फैलाव से बचने के लिए मजबूत योजना तैयार करना मौलिक है। हालांकि, भारत में कम से कम 39 प्रतिशत राजधानी शहरों में सक्रिय स्थानिक योजनाएं नहीं हैं। रिपोर्ट में 82 नगरपालिका कानूनों और 44 शहर और देश नियोजन अधिनियमों का अध्ययन शामिल है।