छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में तलाईपल्ली स्थित एनटीपीसी कोयला खनन परियोजना में कोयले के अवैध खनन और चोरी रोकने के लिए गुरुवार को सीआईएसएफ की 362वीं खास यूनिट को तैनात किया गया है। फिलहाल, कैप्टिव कोयला खदान में पहले चरण के तहत 101 जवान तैनात किए गए हैं। हालांकि इस खदान के लिए 265 स्वीकृत पद किए गए हैं। नई यूनिट का अधिष्ठापन, कोयला क्षेत्र में सीआईएसएफ की मौजूदगी को और ज्यादा मजबूत बनाता है। सीआईएसएफ ने माइनिंग क्षेत्र में विघटनकारी गतिविधियां, अवैध खनन और अन्य खतरों को रोकने के लिए विशेष सशस्त्र सुरक्षा प्रारंभ कर दी है।
यह सीआईएसएफ की 362वीं यूनिट है, जो देश के सबसे तेजी से विकसित होते कैप्टिव कोयला खदानों में से एक की सुरक्षा संभालेगी। यह तैनाती परियोजना के विस्तार और सीआईएसएफ के लिए विकसित हो रही आधारभूत संरचना के अनुरूप चरणबद्ध योजना के तहत की गई है। एनटीपीसी तलाईपल्ली कोयला खनन परियोजना देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह खदान लारा सुपर थर्मल पावर प्लांट को कोयला उपलब्ध कराती है, जिससे कई राज्यों में बिजली आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद मिलती है।
भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को समर्थन मिलता है। सालाना करोड़ों टन उत्पादन के साथ तलाईपल्ली खदान राष्ट्रीय ग्रिड और औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुकी है। क्षेत्र में पहले से रहे वामपंथी उग्रवाद की चुनौतियों और खनन गतिविधियों के बड़े पैमाने को देखते हुए, मजबूत सुरक्षा ढांचे की हमेशा से आवश्यकता रही है। सीआईएसएफ की तैनाती से यहां हर पल विशेष सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध होगी, जो कर्मचारियों, उपकरणों और महत्वपूर्ण संपत्तियों की रक्षा करेगी। अवैध खनन और चोरी को रोकेगी। महत्वपूर्ण सामग्री के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करेगी। इससे जिला प्रशासन के साथ समन्वय भी बेहतर रहेगा। आसपास के समुदायों के लिए सुरक्षा माहौल मजबूत होगा।
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तलाईपल्ली में सीआईएसएफ की समर्पित यूनिट का संचालन यह स्पष्ट संदेश देता है कि केंद्र सरकार संवेदनशील क्षेत्रों में रणनीतिक ऊर्जा परिसंपत्तियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। रायगढ़ से सुचारू कोयला उत्पादन क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देता है, रोजगार बढ़ाता है और आसपास के उद्योगों को मजबूत करता है। यह राज्यों में स्थिर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्थानीय समुदायों के लिए सीआईएसएफ की मौजूदगी से आपात स्थिति में प्रतिक्रिया क्षमता, सुरक्षा व्यवस्थाओं का संगठन और समग्र सुरक्षा वातावरण बेहतर होता है। इससे विकास कार्यों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं।