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35वां नेपाली भाषा मान्यता दिवसः शब्दों में सिमटी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल, शब्दकोश का लोकार्पण

Fri, 21 Aug 2026 05:53 PM IST
नवीन पारमुवाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डिगबोई

सार

डिगबोई में 35वां नेपाली भाषा मान्यता दिवस मनाया गया। इस मौके पर 26 हजार से ज्यादा शब्दों वाले 'माध्यमिक नेपाली शब्दकोश' का लोकार्पण किया गया। वक्ताओं ने भाषा और संस्कृति को बचाने और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

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35वां नेपाली भाषा मान्यता दिवस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेपाली भाषा के संरक्षण, संवर्धन और इसकी समृद्ध साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के संकल्प के साथ डिगबोई में 35वां नेपाली भाषा मान्यता दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। श्री श्री नेपाली विष्णु मंदिर समिति और असम नेपाली साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में श्री श्री नेपाली विष्णु मंदिर के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न नेपाली और गोरखा संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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समारोह का मुख्य आकर्षण असम नेपाली साहित्य सभा द्वारा प्रकाशित माध्यमिक नेपाली शब्दकोश’ का असम स्तर पर लोकार्पण रहा। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार युद्धवीर राणा द्वारा संपादित इस शब्दकोश में 639 पृष्ठों पर 26 हजार 364 शब्द संकलित किए गए हैं। आयोजकों के अनुसार, यह विशेष रूप से माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों, शिक्षकों और नेपाली भाषा-साहित्य का अध्ययन करने वालों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री साबित होगा।

सिक्किम में हुआ था पहला लोकार्पण
इस शब्दकोश का राष्ट्रीय स्तर पर पहला लोकार्पण 7 जुलाई को सिक्किम में 212वीं भानु जयंती समारोह के दौरान मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने किया था। डिगबोई में इसका असम स्तर पर लोकार्पण राज्य में नेपाली भाषा के अध्ययन, अध्यापन और साहित्यिक गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शब्दकोश का लोकार्पण असम राज्य एवं राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित तथा हाहाकाटी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के संस्थापक प्रधानाचार्य टीकाराम छेत्री ने किया। कार्यक्रम में असम नेपाली साहित्य सभा केंद्रीय समिति के उपाध्यक्ष लोकनाथ नेवार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
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साहित्यकार युद्धवीर राणा का बहुआयामी योगदान
शब्दकोश के संपादक युद्धवीर राणा तिनसुकिया जिले के तिंगराई-डिगबोई क्षेत्र से जुड़े हैं। साहित्य के अलावा चित्रकला, मूर्तिकला, काष्ठकला, संगीत और रंगमंच में भी उनका योगदान रहा है। वर्ष 2023 में उन्हें ‘नेपाली लोक साहित्य र लोक संस्कृतिको परिचय’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डिगबोई स्थित नेपाली विष्णु मंदिर परिसर में नेपाली आदिकवि भानुभक्त आचार्य की पूर्णाकृति प्रतिमा का निर्माण भी उनके कला-सृजन का उल्लेखनीय उदाहरण है।

भाषा के साथ संस्कृति बचाने पर जोर
कार्यक्रम में श्री श्री नेपाली विष्णु मंदिर समिति के उपाध्यक्ष रत्न बहादुर छेत्री द्वारा रचित ‘संघर्षका गोरेटाहरू (स्मृतिकथा)’ का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंदिर समिति के अध्यक्ष नारायण जैसी ने की। उन्होंने कहा कि शब्दकोश के असम स्तर पर लोकार्पण की मेजबानी संस्था के लिए गौरव की बात है।

समारोह में सिक्किम में आयोजित भाषा दिवस के संदर्भ में मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के संदेश का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने नेपाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में मिली मान्यता को याद करते हुए भाषा संरक्षण और युवा पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने भाषा को किसी भी समुदाय के इतिहास, संस्कृति और पहचान से गहराई से जुड़ा बताया। वक्ताओं ने कहा कि भाषा संरक्षण केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे शिक्षा, साहित्य और दैनिक जीवन में मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। समारोह में गीत और नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। 

कार्यक्रम में असम नेपाली साहित्य सभा के जिला अध्यक्ष जून प्रधान, जिला सचिव थानेश्वर शर्मा, कार्यक्रम समन्वयक हीरालाल शर्मा, भारतीय गोरखा परिसंघ के जिला अध्यक्ष मदन गुरुंग सहित विभिन्न नेपाली और गोरखा संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आयोजकों ने कहा कि नई पीढ़ी को मातृभाषा और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना ही भाषा के भविष्य को सुरक्षित रखने का सबसे मजबूत आधार है।
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