पूर्व-अर्धसैनिक बल कल्याण संघ (कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन) ने केंद्रीय सुरक्षा कर्मियों के 35 लाख से अधिक परिजनों को बेहतर इलाज की सुविधा न मिलने का मुद्दा उठाया है। मौजूदा समय में केंद्रीय अर्धसैनिक एवं सशस्त्र बलों में करीब 11 लाख कर्मी ड्यूटी पर हैं। इनके अलावा रिटायर्ड कर्मी एवं उनके परिजनों को मिलाएं तो यह संख्या काफी ज्यादा हो जाती है। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के लाखों पैरामिलिट्री परिवारों को केंद्र सरकार द्वारा मुहैया कराई गई स्वास्थ्य सुविधाएं नाकाफी हैं।
ये सुविधाएं मौजूदा जवानों एवं उनके परिजनों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत साबित हो रही हैं। देशभर में 71 जगहों पर सीजीएचएस सेवा उपलब्ध है, लेकिन बहुत से जिले ऐसे हैं, जहां पर 100-150 किलोमीटर दूर तक कोई भी सीजीएचएस डिस्पेंसरी नहीं है। ऐसे में जवानों के परिजनों को इलाज के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। रिटायर्ड कर्मियों के परिजनों भी प्राइवेट या सरकारी अस्पतालों में धक्के खाने पड़ते हैं।
रणबीर सिंह के मुताबिक, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लाखों जवान देश की कानून व्यवस्था को बनाए रखने, लंबी सरहदों की चाक-चौबंद चौकीदारी, महत्वपूर्ण औधोगिक संस्थानों, सरकारी भवनों, मेट्रो, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सतर्क निगाहों से सुरक्षा, समाज में आपसी भाईचारा एवं सामाजिक सौहार्द बनाए रखने, जीरो से 50 डिग्री नीचे तापमान में बर्फीली हिमालयी सरहदों और 50 डिग्री तपते रेगिस्तान में सुरक्षा घेरा मजबूत बनाए रखते हैं। लेकिन जहां तक सुरक्षा बलों के लाखों परिवारों को केंद्रीय सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का सवाल है, तो वह न के बराबर मिल पा रही हैं।
हरियाणा के रेवाड़ी, नारनौल, झज्जर, महेंद्रगढ़, भिवानी, हिसार, जींद, सिरसा, पंजाब के भठिंडा, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, अबोहर फाजिल्का, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला व चीन की सरहद से सटे उत्तराखंड के पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, चम्पावत, चमोली, बागेश्वर, हल्द्वानी, हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर, बिलासपुर, कुल्लू, कांगड़ा, चंबा व मंडी आदि जिलों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों की अच्छी खासी संख्या निवास करती है। इसके अलावा पाकिस्तान से सटे सीमावर्ती इलाकों जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, सीकर, झुनझुनु, नागोर, चुरू, अलवर, जोधपुर और इसी तरह जम्मू-कश्मीर के पुंछ, मैंढर, सांभा, राजौरी व अखनूर इत्यादि जिलों में स्थाई निवास करने वाले लाखों पैरामिलिट्री फोर्स के परिवारों को बेहतर मेडिकल सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
विभिन्न मंत्रियों को सौंपा जा चुका है ज्ञापन
केंद्रीय ग्रहमंत्री अमित शाह, पूर्व गृह मंत्री एवं मौजूदा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन व डीजी सीआरपीएफ वार्ब चेयरमैन से मुलाकात कर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं व सीजीएचएस डिस्पेंसरियों के विस्तार के लिए ज्ञापन सौंपा गया है। बावजूद इसके आज तक सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगी है। एसोसिएशन ने सीजीएचएस डिस्पेंसरियों के विस्तार के लिए देशभर में सर्वेक्षण कराने की बात कही थी।
कई बार यह मांग उठाई गई कि जिन जिलों में बहुतायत संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के परिवार स्थाई निवास करते हैं, वहां डिस्पेंसरियां खोली जाएं। केंद्र सरकार, सेना के लिए जिला स्तरीय ईसीएचएस स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराती है, लेकिन वास्तविक सरहदों के पैरामिलिट्री चौकीदारों के परिवारों को पूरी तरह से अनदेखा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च 2018 के दौरान अपने मन की बात कार्यक्रम में हर तीन जिलों में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। एसोसिएशन की मांग है कि जिला स्तर पर सीजीएचएस डिस्पेंसरियों का विस्तार किया जाए, ताकि अर्धसैनिक बलों के जवानों व उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इससे न केवल अर्धसैनिक बलों बल्कि प्रदेशों में स्थाई तौर पर निवास करने वाले केंद्रीय सरकार के लाखों कर्मचारियों को भी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सकेगा।