केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने दसवीं कक्षा में पास होने के लिए 33 फीसदी अंक होने की अनिवार्यता की थी। यह राहत मार्च 2018 परीक्षा के लिए दी गई थी। इस तरह से विद्यार्थियों को पास होने के लिए लिखित परीक्षा और आंतरिक परीक्षा को मिलाकर 33 फीसदी की जरूरत थी। अब यही व्यवस्था 2018-19 सत्र के तहत मार्च में होने वाली परीक्षा में भी जारी रह सकती है। उल्लेखनीय है कि फरवरी में यह व्यवस्था बोर्ड ने सिर्फ एक साल के लिए लागू करने की बात कही थी।
सीबीएसई के एक अधिकारी के अनुसार इस संबंध में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं किया गया है। लेकिन माना जा रहा है कि इसकी संभावना बहुत अधिक है कि लिखित और आंतरिक परीक्षा को मिलाकर 33 फीसदी लाने की अनिवार्यता जारी रहे। शैक्षणिक सत्र 2016-17 तक परीक्षा में 80 फीसदी और आंतरिक मूल्यांक के 20 फीसदी अंकों में अलग-अलग 33 फीसदी लाने पड़ते थे। सीबीएसई की इस साल के शुरुआत में हुई परीक्षा समिति की बैठक में इस नियम पर चर्चा की गई थी।
इसके बाद मार्च में एक साल के लिए इस व्यवस्था को लागू किया गया था। लेकिन इस बार भी विद्यार्थियों को इसी व्यवस्था का लाभ मिल सकता है। इस तरह से कोई विद्यार्थी यदि दोनों परीक्षा में कुल 33 फीसदी अंक हासिल कर लेता है तो वह पास माना जाएगा।