20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दौरान 31 विधेयकों पर विचार किए जाने की संभावना है। इस सूची में सबसे ऊपर दिल्ली से जुड़ा अध्यादेश है। सरकार कोशिश करेगी कि इसे दोनों सदनों से जल्द से जल्द से पास कराकर कानून का रूप दिया जाए। एक अहम बात यह भी है कि इसमें समान नागरिक संहिता को लेकर कोई भी जिक्र नहीं है।
प्रह्लाद जोशी ने विपक्षी गठबंधन पर भी तंज कसा
इस बीच संसद के मानसून सत्र से पहले एनडीए की बैठक हुई। इस बैठक से पहले सरकार ने सभी दलों के साथ भी अहम बैठक की। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्षी गठबंधन पर भी तंज कसते हुए कहा कि नाम बदलने से लोग नहीं बदल जाएंगे। लोग तो वही हैं, यह तो वह बात है कि पुरानी वाइन और नई बोतल।
विपक्ष को हंगामा नहीं करना चाहिए: अठावले
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में मैंने मुद्दा उठाया है कि सदन सुचारू रूप से चले, विपक्ष को हंगामा नहीं करना चाहिए। इसके अलावा मैंने दलितों और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और SC, ST को प्रमोशन और प्राइवेट सेक्टर में उन्हें आरक्षण देने का मुद्दा उठाया है।
अधीर, अन्य नेताओं ने दिल्ली सेवा अध्यादेश पर प्रस्ताव का नोटिस दिया
कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी, टीएमसी के सौगत रॉय, द्रमुक के ए. राजा और आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने दिल्ली सेवा अध्यादेश के खिलाफ लोकसभा में वैधानिक प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस दिया है। लोकसभा सचिवालय ने नोटिस स्वीकार कर लिया है। जब भी संसद सत्र के दौरान किसी अध्यादेश को बदलने के लिए विधेयक पेश किया जाता है, तो इसके विरोध में विपक्षी सदस्य वैधानिक प्रस्ताव पेश करते हैं।
11 अगस्त तक चलेगा सत्र
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से होगी। जानकारी के मुताबिक, मानसून सत्र 11 अगस्त तक चल सकता है। इस दौरान संसद के दोनों सदनों की कुल 17 बैठकें प्रस्तावित हैं।
मध्यस्थता विधेयक में संसोधनों को दी मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने मध्यस्थता विधेयक में संशोधनों को मंजूरी दे दी, जिसमें मध्यस्थता कार्यवाही पूरी करने की अधिकतम समयसीमा 360 दिन से घटाकर 180 दिन करना शामिल है। कानून मंत्रालय के विधेयक में आधिकारिक संशोधनों को गुरुवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। मध्यस्थता विधेयक, 2021 को दिसंबर 2021 में राज्यसभा में पेश किया गया था। बाद में इसे कानून और कार्मिक मामलों की संसदीय समिति के पास भेजा गया, जिसने अपनी रिपोर्ट दी। सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमंडल ने जिन आधिकारिक संशोधनों को मंजूरी दी है, वे काफी हद तक संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। सरकार की ओर से स्वीकार की गई पैनल की अन्य प्रमुख सिफारिशों के तहत मुकदमे से पहले मध्यस्थता को अनिवार्य के बजाय स्वैच्छिक बना दिया गया है।
संशोधनों में क्या-क्या?