भारतीय राजमार्गों का विकास
आईआरएपी के मुताबिक वैसे तो किफायती तरीके से भी राजमार्गों को 5 स्टार रेटिंग के लायक बनाया जा सकता है लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों के लिए यह ज्यादा यथार्थवादी कदम होगा कि वे सभी सड़क यात्रियों के लिए कम से कम 3 स्टार रेटिंग लायक सड़क बनाने का लक्ष्य रखें।
यह रिपोर्ट इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग देश के पूरे रोड नेटवर्क का सिर्फ दो फीसदी हिस्सा हैं। लेकिन सड़क हादसे में होने वाली कुल मौतों में से करीब 36 फीसदी इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर होती हैं। साल 2017 में करीब 52,000 लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई। जबकि करीब 40,000 लोगों की मौत राज्य राजमार्गों पर हुई।
अध्ययन के मुताबिक स्वर्णिम चतुर्भुज के दिल्ली-मुंबई नेटवर्क के करीब 824 किलोमीटर हिस्से को उस स्थिति में 1 या 2 स्टार रेटिंग दी गई है जब रफ्तार की अधिकतम सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा हो। अगर अधिकतम रफ्तार की सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा हो तो 2,795 किलोमीटर लंबाई वाले इस नेटवर्क का कमोबेश 1,517 किलोमीटर यानी 54 फीसदी हिस्सा असुरक्षित श्रेणी में आ जाएगा।
बता दें कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने पिछले साल अप्रैल में अधिकतम रफ्तार सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित किया था।