इस साल रासायन शास्त्र का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से तीन वैज्ञानिकों को दिया जाएगा। मॉलीक्यूलर मशीन (आणविक यंत्र) विकसित करने के लिए फ्रांस के जीन पीअरे सौवेज, ब्रिटिश मूल के जे फ्रेजर स्टोडार्ट और डच वैज्ञानिक बर्नार्ड फेरिंगा को रसायन शास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा।
पुरस्कार के तहत तीनों वैज्ञानिकों को 9.3 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि प्रदान की जाएगी। रॉयल स्वीडिश अकादमी ऑफ साइंस की ओर से कहा गया है कि आणविक मशीन के इस्तेमाल से नए पदार्थों के निर्माण, सेंसर और ऊर्जा संचय तंत्र के विकसित होने की पूरी संभावना है। सोवेज ने 1983 में पहली बार आणविका मशीन की दिशा में पहला कदम बढ़ाया था और उन्होंने उस समय दो गोल आकार वाले अणुओं को एक कड़ी के तौर पर जोड़ने में सफलता पाई थी।
आणविक मशीन की दिशा में दूसरा कदम 1991 में स्टाडर्ट ने उस वक्त बढ़ाया जब उन्होंने एक गोलाकार आणिक घेरा को एक कमजोर आणविक धुरी से जोड़ दिया और यह दर्शाया कि यह घेरा इस आणविक धुरी को आगे ले जाने में सक्षम है। फेरिंगा 1999 में एक आणविक मोटर का विकास करने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बने। आणविक मोटरों का इस्तेमाल करके उन्होंने एक नैनोकार भी बनाई।