सीआरपीएफ के पूर्व डीजी एवं गृह मंत्रालय में मौजूदा वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के. विजय कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान यह परंपरा शुरू की थी।
इस साल सीआरपीएफ की कमान संभालने वाले डॉ. एपी महेश्वरी ने यह परंपरा दोबारा से शुरू की है। डॉ. महेश्वरी बताते हैं कि फोर्स में हर स्तर पर सभी की बात सुननी चाहिए।
इतनी बड़ी फोर्स है, ऐसे में किसी को भी शिकायत हो सकती है।
फरवरी से हमने यह व्यवस्था लागू की थी कि सप्ताह में सोमवार से लेकर शुक्रवार तक कोई भी जवान और अफसर डीजी या आईजी से मिल सकता है। इ
सके लिए उसे अपने कमांडेंट या प्राधिकृत अधिकारी को आवेदन देना होगा।
वहां से मंजूरी मिलने के बाद वह बल मुख्यालय आ सकता है। यहां उसे पर्स विभाग में आवेदन जमा कराना होगा। यह काम दोपहर एक बजे से पहले हो जाना चाहिए।
अगर कोई कर्मी एक बजे के बाद वहां पहुंचता है तो उस दिन उसकी मुलाकात संभव नहीं होगी।
इसके लिए उसे अगले दिन का इंतजार करना होगा। प्रतिदिन मुलाकात का समय दोपहर साढ़े 12 बजे से लेकर डेढ़ बजे तक रखा गया है।
डॉ. महेश्वरी कहते हैं कि सीआरपीएफ एक बड़ा परिवार है। यहां सबके बीच तालमेल बहुत जरूरी है।
जवानों को वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है। जवानों और अफसरों को किसी तरह की कोई दिक्कत न हो, इसलिए सप्ताह में पांच दिन उनसे बात करने का प्लान तैयार किया गया था।
जब उन्हें कोई शिकायत नहीं होगी, तो वे अपनी ड्यूटी बेहतर तरीके से करेंगे।
महानिदेशक डॉ. एपी महेश्वरी ने बताया कि अब कोरोना संक्रमण की वजह से व्यवस्था में थोड़ा बदलाव किया गया है।
पहले कोई भी कर्मचारी सीधे मुख्यालय आकर अफसर के सामने अपनी बात रख सकता था।
अब सोशल डिस्टेंसिंग का सुरक्षा चक्र न टूटे और बलकर्मी संक्रमण से बचे रहें, इसके लिए उन्हें खुद मुख्यालय न आने की सलाह दी गई है।
वे शुक्रवार को वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए अपनी शिकायत या सुझाव दे सकते हैं।
जैसे ही संक्रमण का खतरा समाप्त होगा, वे बल मुख्यालय में अधिकारी के सामने उपस्थित होकर अपनी बात रख सकेंगे।
डॉ. एपी महेश्वरी ने बल की कमान संभालने के कुछ दिन बाद ही आदेश दिए थे कि देश के लिए अपना बलिदान देने वाले अफसरों और जवानों की पत्नियों को विधवा नहीं कहा जाएगा।
बल मुख्यालय की ओर से होने वाले सभी तरह के पत्राचार में अब विधवा शब्द की जगह पर 'वीर नारी' लिखा रहेगा।
इससे पहले उन्होंने सीआरपीएफ के बल 'मोटो' 'सीआरपीएफ सदा अजय, भारत माता की जय' में भी बदलाव किया था।
डीजी डॉ. एपी महेश्वरी ने कहा था कि 'मोटो' में 'अजय' के स्थान पर 'अजेय' लिखा जाए।' अजेय' का मतलब होता है कि जिसे जीता न जा सके। कोई उस पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता।