कानूनी विशेषज्ञों ने टूजी घोटाले में विशेष अदालत के फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक वर्ग ने कहा कि बरी होना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह राजनीतिक रूप से स्थिति ज्यादा गंभीर कर देगा। वहीं दूसरे लोगों का कहना है कि एक बुलबुला बनाया गया था, जो सुबूतों के अभाव में फट गया। पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी ने कहा, बिना पढ़े वह फैसले को अच्छा या बुरा नहीं कह सकते हैं, लेकिन यह अंतिम फैसला नहीं है।
सीबीआई उच्च न्यायालय में अपील कर सकती है। सोराबजी पूर्व की एनडीए सरकार में अटार्नी जनरल थे। वहीं वरिष्ठ वकील अजीत कुमार सिन्हा और दुष्यंत देव ने इस हार के लिए अभियोजन पक्ष पर सवाल उठाए। उच्च न्यायालय के पूर्व जज सिन्हा ने फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा, यह दिखाता है कि जांच कितनी खराब तरीके से हुई, जहां अभियोजन पक्ष मुकदमा साबित नहीं कर सका। यह फैसला जांच एजेंसियों खासकर सीबीआई जैसी बड़ी एजेंसियों पर संदेश खड़ा करेगा।
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वकीलों के पास मुकदमा साबित करने के लिए पर्याप्त तथ्य ही नहीं थे
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वहीं राजनीतिक रूप से भी स्थिति गंभीर होगी। भविष्य में हम लंबा राजनीतिक स्पेक्ट्रम देखेंगे। सिन्हा ने विशेष अदालत के निष्कर्ष का जिक्र करते हुए कहा, सीबीआई ने बेहद जज्बे के साथ मुकदमा शुरू किया। लेकिन अंतिम चरण में विशेष पब्लिक प्रासिक्यूटर और सीबीआई के प्रासिक्यूटर अलग-अलग दिशाओं में चले गए, बिना किसी समन्वय के। हालांकि वरिष्ठ वकील विकास सिंह, हाईकोर्ट के पूर्व जज आरएस सोढ़ी की राय अलग है।
उनके मुताबिक वकीलों के पास मुकदमा साबित करने के लिए पर्याप्त तथ्य ही नहीं थे। सोढ़ी ने कहा, सुबूतों में कमी थी। उनके पास मुकदमे के लिए सबसे अच्छे वकील थे। लेकिन मामले में ही कुछ नहीं था। एक बुलबुला बनाया गया था, जो अब फूट गया है। घोटाला बस इतना था कि पहले आओ पहले आओ को पात्रता कैसे पात्रता कैसे माना गया। तथ्यों के अभाव में वकील इसे भी साबित नहीं कर पाए और इसलिए सारे लोग बरी हो गए। सिंह ने कहा कि वे शुरू से कह रहे थे कि यह घोटाला नहीं है।