देश में सितंबर, 2018 से अगस्त, 2019 तक आतंकवाद रोधी व अन्य अभियानों में 292 पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। इनमें सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसे अर्द्धसैनिक बलों के जवान भी शामिल हैं। गृहमंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आजादी से लेकर इस साल अगस्त तक 35 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने अपना बलिदान दिया है।
आंकड़ों के मुताबिक, अर्द्धसैनिक बलों के शहीद होने वाले जवानों में से ज्यादातर ने नक्सलवाद और सीमा पार आतंकवाद के चलते जान गंवाई। वहीं, राज्य पुलिस के कर्मियों ने नक्सलियों, आतंकियों, शराब व बालू माफिया और कानून व्यवस्था से जुड़े अन्य दायित्व को निभाते समय जान दी। शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों के नाम सोमवार को पुलिस स्मृति दिवस के दौरान पढ़े जाएंगे। यह दिवस 1959 में चीनी सैनिकों की गोलीबारी में शहीद हुए 10 पुलिसकर्मियों की याद में मनाया जाता है।