अवैध कब्जाधारियों से जवाहरबाग खाली कराने को लेकर मथुरा में बृहस्पतिवार को हुई भारी हिंसा के पीछे गंभीर प्रशासनिक चूक सामने आ रही है। जवाहरबाग में जमे सैकड़ों लोगों ने भारी मात्रा में हथियार और बम जमा कर लिए, लेकिन पुलिस प्रशासन सोता रहा।
इतना ही नहीं, फरवरी 2015 में ही खुद पुलिस-प्रशासन की संयुक्त रिपोर्ट में जवाहरबाग में कब्जाधारियों के पास असलहे होने की रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन बृहस्पतिवार को अपनी ही इस पुरानी रिपोर्ट को भुला दिया गया और पुलिस अफसर आधी अधूरी तैयारी से ही पहुंच गए। इसी लापरवाही के चलते एसपी सिटी और एसओ समेत 27 लोगों को जान गंवानी पड़ गई।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी माना है मथुरा की घटना अफसरों की चूक का नतीजा है। उनका कहना है कि पुलिस को पूरी तैयारी के साथ मौके पर जाना चाहिए था। इसमें लापरवाही बरती गई। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ के कमिश्नर इस मामले की जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
जवाहर बाग से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और वाहन बरामद हुए हैं। बरामद असलाह में 47 देशी कट्टे, 6 राइफल, 178 कारतूस, 15 गाडियां, 6 मोटरसाइकिल शामिल हैं। यहां से कुछ दस्तावेज भी पुलिस को मिले हैं जिनकी जांच कराई जा रही है।
15 फरवरी 2015 को मथुरा डीएम ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर कहा था कि जवाहरबाग में कब्जा जमाए लोगों की संख्या 5 से 6 हजार तक है। इनके पास अवैध असलहे भी हैं जिनका ये प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन शासन ने न तो मामले की गंभीरता को समझा न ही रिपोर्ट पर कोई संज्ञान ही लिया। यहां तक कि बृहस्पतिवार को पुलिस ने बिना तैयारी के ही कार्रवाई शुरू कर दी।
उधर, हिंसा में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को 27 पहुंच गई। एक महिला समेत 22 कब्जाधारियों के शव पुलिस ने बाग से बरामद किए हैं, जबकि तीन घायलों ने शुक्रवार दिन में आगरा के अस्पताल में दम तोड़ा।
शुक्रवार को पहुंचे डीजीपी जवीद अहमद और प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि 262 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। ढाई हजार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
करीब ढाई सौ घायलों का इलाज जनपद के प्राइवेट अस्पतालों में कराया जा रहा है। इनमें पुलिस वाले भी शामिल हैं। हमले में शहीद हुए एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव का पूरे पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।