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मथुरा हिंसाः जवाहरबाग में मरने वालों की संख्या 27 हुई, 262 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा

Sat, 04 Jun 2016 01:46 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मथुरा
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अवैध कब्जाधारियों से जवाहरबाग खाली कराने को लेकर मथुरा में बृहस्पतिवार को हुई भारी हिंसा के पीछे गंभीर प्रशासनिक चूक सामने आ रही है। जवाहरबाग में जमे सैकड़ों लोगों ने भारी मात्रा में हथियार और बम जमा कर लिए, लेकिन पुलिस प्रशासन सोता रहा।
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इतना ही नहीं, फरवरी 2015 में ही खुद पुलिस-प्रशासन की संयुक्त रिपोर्ट में जवाहरबाग में कब्जाधारियों के पास असलहे होने की रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन बृहस्पतिवार को अपनी ही इस पुरानी रिपोर्ट को भुला दिया गया और पुलिस अफसर आधी अधूरी तैयारी से ही पहुंच गए। इसी लापरवाही के चलते एसपी सिटी और एसओ समेत 27 लोगों को जान गंवानी पड़ गई।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी माना है मथुरा की घटना अफसरों की चूक का नतीजा है। उनका कहना है कि पुलिस को पूरी तैयारी के साथ मौके  पर जाना चाहिए था। इसमें लापरवाही बरती गई। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ के कमिश्नर इस मामले की जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। 
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जवाहर बाग से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और वाहन बरामद हुए हैं। बरामद असलाह में  47 देशी कट्टे, 6 राइफल, 178 कारतूस, 15 गाडियां, 6 मोटरसाइकिल शामिल हैं। यहां से कुछ दस्तावेज भी पुलिस को मिले हैं जिनकी जांच कराई जा रही है।

15 फरवरी 2015 को मथुरा डीएम ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर कहा था कि जवाहरबाग में कब्जा जमाए लोगों की संख्या 5 से 6 हजार तक है। इनके पास अवैध असलहे भी हैं जिनका ये प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन शासन ने न तो मामले की गंभीरता को समझा न ही रिपोर्ट पर कोई संज्ञान ही लिया। यहां तक कि बृहस्पतिवार को पुलिस ने बिना तैयारी के ही कार्रवाई शुरू कर दी।

उधर, हिंसा में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को 27 पहुंच गई। एक महिला समेत 22 कब्जाधारियों के शव पुलिस ने बाग से बरामद किए हैं, जबकि तीन घायलों ने शुक्रवार दिन में आगरा के अस्पताल में दम तोड़ा।

शुक्रवार को पहुंचे डीजीपी जवीद अहमद और प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि 262 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। ढाई हजार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

करीब ढाई सौ घायलों का इलाज जनपद के प्राइवेट अस्पतालों में कराया जा रहा है। इनमें पुलिस वाले भी शामिल हैं। हमले में शहीद हुए एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव का पूरे पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।

आगरा के बजाय अलीगढ़ के कमिश्नर करेंगे जांच

प्रदेश सरकार ने मथुरा मामले की जांच आगरा के बजाय अलीगढ़ के मंडलायुक्त से कराने का फैसला किया है। शासन की ओर से बृहस्पतिवार रात आगरा के कमिश्नर को जांच सौंपे जाने की जानकारी दी गई थी।

शुक्रवार सुबह बताया गया कि अब अलीगढ़ के मंडलायुक्त जांच करेंगे। शासन के सूत्रों का कहना है कि चूंकि मथुरा आगरा मंडल में ही आता है इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए दूसरे मंडल के कमिश्नर को जांच सौंपी गई है।

गृह मंत्री राजनाथ ने की अखिलेश से बात
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जवाहरबाग हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बातचीत कर पूरे हालात का जायजा लिया। राजनाथ ने कहा है कि केंद्र हालात को सामान्य करने के लिए हर संभव मदद को तैयार है। राज्य सरकार ने केंद्र को भी बताया कि पुलिस जवाहर पार्क को खाली कराने से पहले रेकी करने गई थी कि अतिक्रमणकारियों ने उन पर हमला कर दिया। 

गिरफ्तार कब्जाधारियों पर होगी एनएसए की कार्रवाई: डीजीपी

डीजीपी जावीद अहमद ने शुक्रवार को मथुरा पहुंचकर जवाहरबाग हिंसा के पूरे मामले की जानकारी ली। डीजीपी ने कहा कि उपद्रवियों पर एनएसए की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मीडिया को बताया कि जवाहर बाग में उपद्रवियों का नेतृत्व कर रहे रामवृक्ष यादव, चंदन बोस, राकेश बाबू और गिरीश संभवत: की मौत हो गई है।

अगर भाग गए हैं तो इन्हें जल्द पकड़ा जाएगा। डीजीपी ने बताया कि दो-तीन दिन बाद जवाहरबाग को खाली कराने की योजना थी। पुलिस की छोटी पार्टी बृहस्पतिवार शाम रेकी के लिए गई थी, जिस पर कब्जाधारियों ने लाठी-डंडों और असलाह से हमला बोल दिया। पुलिस ने बहादुरी के साथ मुकाबला किया। 

मथुरा हिंसा कानून व्यवस्था की गंभीर नाकामी : किरेन रिजिजू

केंद्र सरकार मथुरा की हिंसा को राज्य पुलिस और खुफिया तंत्र की नाकामी मान रही है। गृहराज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हैरानी जताई है कि स्थानीय पुलिस को एक पार्क में चल रही गंभीर गतिविधियों के बारे में पता नहीं था।

रिजिजू ने इसे राज्य कानून व्यवस्था की बड़ी नाकामी बताया है। केंद्र आजाद हिंद फौज के नाम पर इतने बड़े हिंसक दल के पनपने के पीछे की साजिश की भी जांच कर रहा है। यह भी हैरानी वाली बात मानी जा रही है कि पार्क में इतने हथियार जुटा लिए गए पुलिस को भनक तक नहीं लगी। 
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प्रदेश के एक मंत्री ने बांधे पुलिस के हाथ

जवाहर बाग में जुटी भीड़ खदेड़ने के लिए कई दफा कोशिश हुई लेकिन हर बार सियासी दखल के कारण पुलिस के हाथ बंधे रहे। प्रदेश सरकार के एक मंत्री तो इस संबंध में अफसरों से बात भी करते थे।

वह अधिकारियों से कहते कि कुछ दिन के बाद यह खुद ही निकल जाएंगे लिहाजा सख्ती न की जाए। शुरुआत में तो जवाहर बाग पर कब्जा करने वालों की संख्या मुश्किल से 500 के करीब ही थी, लेकिन बाद में यह बढ़कर ढाई से तीन हजार तक हो गई थी।

नहीं मिलती थी फोर्स
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जवाहरबाग पर कब्जे को लेकर एसपी सिटी काफी गंभीर थे। वह कई दफा प्लानिंग के साथ जवाहर बाग खाली कराने जाते मगर उन्हें जरूरत के हिसाब से फोर्स ही नहीं मिलती थी। वह कई दफा अधिकारियों के पास भी गए मगर हर बार टाल दिया जाता था।
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