कस्टम अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध
हीरे की कीमत तय करने के लिए कस्टम विभाग पूरी जांच के बाद पैनल नियुक्त करता है। उसी के द्वारा हीरे की कीमत का निर्धारण सर्टिफिकेट जारी होता है। कस्टम विभाग की एयर कार्गो यूनिट हीरे के पैकेट की स्वीकृति देती है जिसके बाद यह व्यापारियों के पास जाता है। इसी वजह से मामले में कस्टम अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।
95 फीसदी पालिस्ड हीरा भारत से होता है निर्यात
भारत में कच्चे हीरे के आयात पर 0.25 फीसदी ड्यूटी लगती है। भारत के व्यापारी कच्चा माल मंगाते हैं और उसे पालिस कर विदेश भेजते हैं। दुनिया में 95 फीसदी पालिस्ड हीरा भारत से ही भेजा जाता है।
इस काम में नीरव मोदी भी रहा है चर्चित
इससे पहले नीरव मोदी के बारे में खुलासा हुआ था कि वह निम्न स्तर का हीरा ज्यादा कीमत में निर्यात करता था ताकि विदेशों से कालाधन कथित तौर पर वापस ला सके।
संयुक्त कोशिशों का नतीजा है यह कार्रवाई
उद्योग के सूत्रों का कहना है कि इन घटनाओं को रोकने के लिए ही ‘रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद’ (जीजेईपीसी) सरकार से मूल्यांकनकर्ताओं के लिए एकमात्र मंजूरी प्राधिकारी बनने का अनुरोध करती रही है। परिषद बीते तीन महीनों से डीआरआई और सरकार के साथ मिलकर काम कर रही थी। उक्त कार्रवाई इन्हीं संयुक्त कोशिशों का नतीजा है।