देश में 'आतंकवाद और ड्रग माफिया' को लेकर निर्णायक लड़ाई शुरू हो गई है। विभिन्न मोर्चों पर एक साथ वार किया जाए, इसके लिए खास प्लान तैयार किया जा रहा है। इस प्लान में केंद्र की 26 सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों की खुफिया विंग शामिल हैं। इन एजेंसियों की मदद से पर्दे के पीछे बैठकर आतंकी गतिविधियों एवं दूसरे अपराधों को विभिन्न तरीके से प्रोत्साहन देने वाले 'व्हाइट कॉलर' अपराधियों को पकड़ा जाएगा। कश्मीर, माओवादी इलाके और उत्तर पूर्व के राज्यों में सक्रिय उग्रवादी समूहों को पूरी तरह खत्म करने के लिए अचूक रणनीति बनाई गई है। आर्मी, नेवी, एनआईए, सीबीआई, आईबी, रॉ, सीएपीएफ, डीआरआई व ईडी सहित 26 केंद्रीय एजेंसियां, केंद्रीय गृह मंत्रालय के मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) के जरिए अपनी खास रणनीति को अंजाम देंगी।
‘आतंकवाद-रोधी दस्तों' के मध्य बेहतर समन्वय
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को इन सभी एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक ली थी। बैठक में सभी राज्यों के डीजीपी को भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शामिल किया गया। सूत्रों के अनुसार, बैठक में केंद्र और राज्यों के 'आतंकवाद-रोधी दस्ते' (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड) के लिए एक समन्वित प्लेटफॉर्म तैयार करने पर सहमति बनी है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को ज्यादा तव्वजो दी जाएगी। आतंकवाद, ड्रग माफिया और नक्सल, इससे अब निपटना नहीं है, बल्कि इसे खत्म करने के प्वाइंट तक पहुंचना है। शाह ने कहा, ये एक निर्णायक लड़ाई है। बॉर्डर क्राइम और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए 'व्हाइट कॉलर यानी सफेदपोश अपराधी, जो पर्दे के पीछे बैठकर उन्हें वित्तीय, हथियार एवं अन्य तरीके से मदद पहुंचाने का काम करते हैं, वे बाहर निकाले जाएंगे। ऐसे लोगों का नेक्सस तोड़ने पर खास ध्यान रहेगा।
संगठित अपराध की सप्लाई चेन को तोड़ना एक बड़ी चुनौती
मैक की हाई प्रोफाइल बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि संगठित अपराधियों की सप्लाई चेन को तोड़ना एक बड़ी चुनौती है। सभी एजेंसियों के प्रमुख इस बात पर सहमत थे। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा है कि आतंकवाद रोकने के लिए सबसे पहले इनके मददगारों को खत्म करना होगा। एक तरफ उनकी सप्लाई चेन टूटेगी और दूसरी तरफ सुरक्षा बल उन पर बड़ा वार करेंगे, तो उनका पूर्ण खात्मा हो सकेगा। ग्लोबल टेरर ग्रुप, नार्को टेरेरिज्म, साइबर अपराध और दूसरे मुल्क में बैठकर आतंकी वारदातों को अंजाम देने वालों पर शिकंजा कसना होगा। इसके लिए केंद्रीय एवं राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों को आपस में बेहतर तालमेल करना पड़ेगा। अब प्रभावी एंटी टेरर कानून की मदद से एनआईए जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियां ऐसे लोगों को आतंकी घोषित कर उनके खिलाफ पूर्ण अधिकारों के साथ कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
इन एजेंसियों को बढ़ाना होगा आपसी तालमेल
मैक की बैठक में मौजूद अधिकारियों ने विभिन्न एजेंसियों के मध्य सूचनाओं के तीव्र आदान-प्रदान की जरूरत पर बल दिया। जांच भले ही कोई एजेंसी करें, लेकिन वह सूचना अविलंब मैक तक पहुंचनी चाहिए। आतंकियों के मददगारों का पता चलते ही एनआईए, ईडी और आईटी जैसी एजेंसियां उनके ठिकानों पर छापा मार सकती हैं। उनके पास आर्थिक स्रोत क्या है, उसका पता लगाया जाएगा। उसमें यह भी देखा जाएगा कि हवाला के जरिए तो पैसा नहीं आया है। शैल कंपनियां भी संगठित अपराध में बड़ी मददगार साबित होती हैं। इनकी जड़ों पर वार करना जरुरी है। इसके लिए राज्य एवं केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर होना चाहिए।
26/11 की घटना के बाद हुआ था मैक का गठन
मुंबई में 26/11 के आतंकी हमले के बाद मैक का गठन किया गया था। इसमें आईबी, रॉ, तीनों सेनाओं की इंटेलिजेंस विंग, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की इंटेलिजेंस इकाई, वित्त मंत्रालय से जुड़ी एजेंसी जैसे 'ईडी, डीआरआई, आयकर' और आरपीएफ सहित करीब 26 एजेंसियां शामिल हैं। मैक की नियमित बैठक में सभी एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। वे अपनी सूचनाएं साझा करते हैं। मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) अभी तक आतंकी हमलों, तोड़फोड़ की अन्य गतिविधियों, तस्करी और नकली करेंसी जैसे विभिन्न अपराधिक मामलों से जुड़े लगभग चार लाख इंटेलिजेंस इनपुट जारी कर चुका है। मैक से प्राप्त इनपुट के आधार पर सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद बनी रहती हैं। यहां के अलर्ट के बाद आतंकी हमलों से लेकर कई दूसरी वारदातों को रोका गया है। मैक के अंतर्गत ही नेशनल मेमोरी बैंक बनाया गया है। यहां पर काउंटर टेरेरिज्म से जुड़ी करीब 17 हजार फाइलें सुरक्षित रखी गई हैं। यह बैंक क्लासिफाइड इलेक्ट्रॉनिक लाइब्रेरी का हिस्सा है। टेरेरिज्म की फाइलों को थ्रैट मैनेजमेंट सिस्टम के साथ लिंक किया गया है।