पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा', के चीफ हाफिज सईद को यह अहसास हो गया था कि इस बार भारत, कोई बड़ा कदम उठाएगा। 22 अप्रैल को हुए पहलगाम के आतंकी हमले के तुरंत बाद 'लश्कर-ए-तैयबा' की जम्मू कश्मीर में सक्रिय प्रॉक्सी विंग 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) ने वह जिम्मेदारी ली थी। इसके लिए बाकायदा, टीआरएफ की तरफ से सोशल मीडिया के जरिए एक बयान भी जारी किया गया। हालांकि इस हमले के बाद भारत में जिस तरह का गुस्सा देखा गया, हाफिज सईद ने उसे भांप लिया था। यही वजह रही कि पहलगाम हमले के 48 घंटे बाद यानी 25 अप्रैल को टीआरएफ ने अपना बयान बदल लिया। सूत्रों का कहना है कि यह सब हाफिज सईद के इशारे पर हुआ था। टीआरएफ ने उस बयान में कहा था, इस हमले में हमारा हाथ नहीं है। आतंकी संगठन के इंटरनल ऑडिट में यह पता चला है कि किसी ने साइबर घुसपैठ कर टीआरएफ का नाम आगे कर दिया है।
टीआरएफ ने ली थी हमले की जिम्मेदारी
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के 15 दिन बाद पाकिस्तान में स्थित आतंकी कैंपों पर स्ट्राइक की है। इस स्ट्राइक को 'ऑपरेशन सिंदूर' का नाम दिया गया। 25 मिनट के इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान के भीतर 100 किलोमीटर के दायरे में आने वाले आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा', 'जैश-ए-मोहम्मद' और 'हिज्बुल मुजाहिदीन' के 9 ठिकानों को तबाह कर दिया है। दर्जनों आतंकियों के मारे जाने की बात कही जा रही है। विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने बुधवार को एक प्रेसवार्ता में यह बात स्पष्ट कर दी है कि पहलगाम आतंकी हमला, पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' द्वारा अंजाम दिया गया था। इस संगठन की प्रॉक्सी विंग टीआरएफ ने इस हमले की जिम्मेदारी भी ली थी। बाद में इस संगठन ने यह भी कहा कि हमारा हाथ नहीं है। देश की खुफिया एजेंसियों के इनपुट से पता चला कि 'लश्कर-ए-तैयबा' की प्रॉक्सी विंग 'टीआरएफ' ने ही पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम दिया था।
हमले के बाद क्या कहा था टीआरएफ ने
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने उसकी जिम्मेदारी ली थी। आतंकी संगठन ने एक पत्र भी जारी किया था। उसमें कहा गया था कि जम्मू कश्मीर में 85 हजार से अधिक डोमिसाइल जारी किए गए हैं। आतंकी संगठन का दावा है कि ये डोमिसाइल स्थानीय लोगों को नहीं, बल्कि बाहरी लोगों को प्रदान किए गए हैं। इससे जेएंडे की डेमोग्राफी को बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस तरह का आतंकी हमला, लोगों को गैर कानूनी तरीके से जम्मू कश्मीर में बसाने के प्रयासों का नतीजा है। टीआरएफ ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली। यह संगठन पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' की प्रॉक्सी विंग है। कई वर्षों से टीआरएफ, जम्मू कश्मीर में आतंकी हमलों को अंजाम दे रही है। खासतौर पर, जेएंडके में सुरक्षा बलों पर हमले और टारगेट किलिंग, ये टीआरएफ की रणनीति का हिस्सा रहा है। टीआरएफ ने पहले भी गैर-कश्मीरियों को अपना निशाना बनाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा यूएपीए के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
हाफिज सईद को था भारत की स्ट्राइक का अंदाजा
केंद्रीय एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमला हुआ था। टीआरएफ ने उसकी जिम्मेदारी ली थी। हमले के बाद भारत में जिस तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली, उससे हाफिज सईद को यह अंदाजा हो गया था कि भारत, इस बार चुप नहीं बैठेगा। नई दिल्ली में पीएम हाउस में हो रही लगातार बैठकें और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान कि जवाब दिया जाएगा, इससे यह तय हो गया था कि देर सवेर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर स्ट्राइक होगी। 25 अप्रैल को टीआरएफ द्वारा एक पत्र जारी किया गया। इसमें कहा गया कि संगठन ने अपना ऑडिट किया है। उसमें यह बात निकल कर आई है कि पहलगाम के आतंकी हमले में उसका कोई हाथ नहीं है। ये भारतीय खुफिया एजेंसियों की कोई चाल है। साइबर तकनीक के जरिए यह बात फैला दी गई कि टीआरएफ ने यह हमला कराया है। अब विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने ये साफ कर दिया है कि टीआरएफ ने ही पहलगाम में हमला किया था।