भारत का पहला गर्भाशय ट्रांसफर गुरुवार को पुणे के अस्पताल में किया गया, जिसके बाद हर तरफ इस सफल सर्जरी के लिए भारतीय डॉक्टरों की तारीफ हुई। लेकिन अब दुनिया का पहला गर्भाशय ट्रांसफर करने वाले स्वीडिश डॉक्टर ने दावा किया है कि सर्जरी में किसी तरह की तैयारी नहीं की गई थी जिससे मरीज की जान को खतरा था।
गोटेबोर्ग विश्वविद्यालय के तहत स्वीडन की सहलेग्रेन्स्का अकादमी में प्रसूति विभाग और स्त्री रोग विभाग के प्रमुख डॉ. मैट ब्रानस्ट्रोम ने इस सर्जरी को भारतीय डॉक्टरों का बिना किसी तैयारी का करार देते हुए सिर्फ दुनियाभर में पब्लिसिटी और वाहवाही लूटने वाला कदम बताया। बता दें कि डॉ. ब्रानस्ट्रोम ने स्वीडन में 2012 में पहला सफल पहला गर्भाशय ट्रांसफर किया था।
उन्होंने कहा कि इस तरह की बड़ी सर्जरी के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम होती है। हमारी टीम में दुनियाभर से के उच्च कोटि के डॉक्टर हैं जो सर्जरी के लिए जरूरी तमाम तैयारियों के साथ अपने काम को अंजाम देते हैं।
गौरतलब है कि पुणे की गैलेक्सी केयर लैपरोस्कोपी इंस्टीट्यूट (जीसीएलआई) में 12 डॉक्टरों की एक टीम ने इस ऑपरेशन को सफल बनाया था। दरअसल, 21 साल की महिला गर्भधारण करने में असमर्थ थी, इसलिए उसकी मां ने ही अपना गर्भाशय प्रत्यारोपण कर दिया।