केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की कि 'जांच में उत्कृष्टता' के लिए 21 महिलाओं सहित देश के 121 पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया गया है। इन 121 पुलिस अधिकारियों में सीबीआई के 15, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र पुलिस के 10-10, उत्तर प्रदेश पुलिस के आठ, केरल और पश्चिम बंगाल के सात और शेष अन्य राज्यों और केंद्र शआसित प्रदेशों के अधिकारी शामिल हैं।
इस वर्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सौ से अधिक पुलिस कर्मियों को जांच के लिए उत्कृष्टता पदक दिए गए हैं जिनमें नरेंद्र दाभोलकर और भाजपा नेता योगेश गौड़ा की हत्या की गुत्थी और मुजफ्फरपुर आश्रय गृह जैसे सनसनीखेज मामले सुलझाने वाले सीबीआई के 15 अधिकारी भी शामिल हैं।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि वर्ष 2020 के लिए 121 पुलिस अधिकारियों को अन्वेषण में उत्कृष्टता के लिए केंद्रीय गृह मंत्री पदक प्रदान किया गया है।
वक्तव्य के अनुसार सीबीआई के 15, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र पुलिस के दस-दस, उत्तर प्रदेश पुलिस के आठ, केरल और पश्चिम बंगाल पुलिस के सात-सात अधिकारियों को पदक दिए गए।
सीबीआई के प्रवक्ता आर के गौड़ ने कहा कि गृह मंत्रालय ने अन्वेषण में उत्कृष्टता के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य/संघ शासित प्रदेशों की पुलिस जांच एजेंसियों के अधिकारियों के लिए यह पदक प्रदान करने की योजना शुरू की है।
पदक की स्थापना 2018 में की गई थी। इसका उद्देश्य अपराध की जांच में उत्कृष्टता को प्रोत्साहन देना और जांच करने वाले अधिकारियों को मान्यता प्रदान करना है।
इस प्रतिष्ठित पदक से सम्मानित मुंबई पुलिस की विशेष अपराध शाखा में सहायक पुलिस निरीक्षक सुभाष रामरूप सिंह ने विशेष उपकरणों की सहायता से ठाणे की एक खाड़ी की गहराइयों से वह हथियार ढूंढ निकाला था जिससे नरेंद्र दाभोलकर की 2013 में हत्या की गई थी।
सिंह द्वारा की गई जांच से एम एम कलबुर्गी, गौरी लंकेश और वामपंथी नेता गोविंद पानसारे की हत्याओं के के संबंध में भी सुराग मिला था।
गृह मंत्री पदक से सम्मानित एक अन्य अधिकारी निरीक्षक राकेश रंजन ने कर्नाटक के धारवाड़ में भाजपा कार्यकर्ता योगेश गौड़ा की हत्या की गुत्थी सुलझाई थी।